“कभी-कभी आपको  उस पृष्ठ/पन्ने को बदलना पड़ता है, जिस पर फंसे होते है। आप फंसे हुए पृष्ठ की तुलना में अपनी जिंदगी में और भी कुछ कर सकते हैं। आगे बढ़ने से डरना बंद करिये। चोट के इस अध्याय को बंद करें, और इसे फिर बार-बार ना पढ़े। यह समय है कि इस बात को समझने का आप अपने जीवन  को और भी कितना और, कैसे बेहतर बना सकते है। उन चीजों से आगे बढ़ें जो आपके लायक नहीं हैं। अपने अतीत में जो टूटा हुआ है उसे ठीक करने की कोशिश न करें, अपने भविष्य को कुछ बेहतर बनाएं। ”

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