संघर्ष से सफलता तक: कभी कॉलेज में थे माली आज हैं उसमें प्रिंसिपल!

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कहते हैं कि कोई सपना सिर्फ ख्वाबों से पूरा नहीं होता बल्कि उसके लिए दिन रात एक करने पड़ते हैं। जो लोग लगातार अपने लक्ष्य के प्रति प्रयासरत रहता है उसकी मेहनत कभी भी बेकार नहीं जाती। अपनी अटूट मेहनत और लगन से सफलता का आसमान छूने वाले हैं छत्तीसगढ़ के ईश्वर सिंह।

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ईश्वर सिंह ने जिस प्रकार से मेहनत के दम के पर कामयाबी हासिल की है उससे वह लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गए हैं। ईश्वर सिंह को पढ़ाई पूरी करने के लिए शुरुआती दिनों कॉलेज में बतौर माली, वॉचमैन और सुपरवाइजर के रूप में काम करना पड़ा था लेकिन अब वह 2015 से इस कॉलेज के प्रिंसिपल हैं।

ISHWAR SINGH @WORK

19 साल की उम्र से शुरू किया था सफर

छत्तीगढ़ में बैतुल के पास घुटिया गांव में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद ईश्वर नौकरी की तलाश में भिलाई पहुंचे। यहां उन्हें एक कपड़े की दुकान में 150 रुपए महीने के वेतन पर नौकरी मिल गई। वह आगे की पढ़ाई कर कुछ बनना चाहते थे। तो उन्होंने अपनी कमाई का एक हिस्सा बचाना शुरू किया और इस पैसे बीए के लिए फॉर्म डाला।

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वहां यहां के एक कॉलेज में माली का काम करने लगे। यह सब उन्होंने 80 के दशक में किया। इसी वक्त 1989 में उन्होंने स्नातक की पढ़ाई पूरी की, लेकिन इस दौरान उन्हें कई प्रकार के काम जैसे- माली, वॉचमैन, पार्किंग स्टैंड कीपर और कंस्ट्रक्शन साइट पर सुपरवाइजर की नौकरी करनी पड़ी।

बीए की पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्होंने एक कॉलेज में बतौर क्राफ्ट टीचर एडमिशन लिया और रात में इसी कॉलेज में वॉचमैन की नौकरी भी करने लगे। उनकी योग्यता को पहचान कर कॉलेज समिति ने उन्हें बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्त कर दिया। इस दौरान एक कॉलेज से उन्हें बीएड करने का ऑफर आया लेकिन आर्थिक तंगी के चलते वह बीएड में एडमीशन नहीं ले सके। कुछ समय बाद उन्होंने एक कॉलेजस बीपीएड किया और फिर उसके बाद एमएड किया। उसके बाद उन्होंने एमफिल भी किया।

कॉलेज समिति के सदस्यों की सिफारिश में उन्हें छत्तीगढ़ के अहेरी स्‍थित कॉलेज कल्याण शिक्षा महाविद्यालय में प्रिंसिपल के रूप में तैनात किया गया।

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