2017 में सुप्रीम कोर्ट सहित देश की अन्य अदालतों ने लिए ये बड़े फैसले, जरूर जानें….

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इस साल सुप्रीम कोर्ट ने कुछ अहम फैसले दिए जिनमें तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित करना, निजता को मौलिक अधिकार घोषित करना और आय से अधिक संपत्ति मामले में एआईएडीएमके की पूर्व महासचिव वी.के. शशिकला को 4 साल जेल की सज़ा सुनाने जैसे आदेश प्रमुख थे। सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला देते हुए हाईकोर्ट के पूर्व जज सी.एस. करनन को अवमानना का दोषी पाते हुए उन्हें 6 महीने की सज़ा सुनाने का आदेश भी दिया। सुप्रीम कोर्ट के अलावा, पंचकुला (हरियाणा) के सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा रेप के दो मामलों में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम को दोषी करार देते हुए 10-10 साल जेल की सज़ा सुनाना, आरुषि-हेमराज मर्डर केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा राजेश और नूपुर तलवार को बरी करना और 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला केस में सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा मुख्य आरोपी ए. राजा और कनिमोढ़ी समेत सभी आरोपियों को बरी करने का फैसला भी इस साल के प्रमुख अदालती फैसले रहे।

3-2 के बहुमत से सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित किया

सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की संविधान पीठ ने शायरा बानो मामले पर सुनवाई करते हुए 3-2 के बहुमत से तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित कर दिया। सुनवाई के दौरान जस्टिस आर.एफ. नरिमन, जस्टिस कुरियन जोसेफ और जस्टिस यू.यू. ललित तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित करने के पक्ष में थे जबकि, चीफ जस्टिस जे.एस. खेहर और जस्टिस अब्दुल नज़ीर इसके पक्ष में नहीं थे। संविधान पीठ के दो जजों- चीफ जस्टिस जे.एस. खेहर और जस्टिस अब्दुल नज़ीर ने माना कि तीन तलाक पाप हो सकता है लेकिन कोर्ट पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। वहीं, तीन जजों- जस्टिस कुरियन, जस्टिस रोहिंटन, जस्टिस यू.यू. ललित ने कहा कि तीन तलाक धर्म का हिस्सा नहीं और संवैधानिक नैतिकता का उल्लंघन है। इससे पहले, पांच जजों की संविधान पीठ के सामने इसे लेकर 6 दिन तक सुनवाई चली थी और इस दौरान कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलों को सुना। ‘तीन तलाक’ पर सुप्रीम कोर्ट में बहस के दौरान केंद्र ने इस मुद्दे को असंवैधानिक बताकर इसे खत्म करने का अनुरोध किया था। वहीं, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इसे पर्सनल लॉ का हिस्सा मानते हुए वैध बताया था जबकि, महिला याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि तीन तलाक महिलाओं के साथ भेदभाव है व कुरान में इसका ज़िक्र नहीं है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा है कि यह फैसला मुस्लिम महिलाओं को समानता प्रदान करने वाला और महिला सशक्तिकरण के लिए एक ताकतवर कदम है।

सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की पीठ का फैसला, निजता एक मौलिक अधिकार

‘आधार’ की वैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ ने इसी साल अगस्त में सर्वसम्मति से ‘निजता के अधिकार’ को मौलिक अधिकार करार दिया। कोर्ट ने कहा कि निजता का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है और निजता की सीमा तय करना संभव नहीं है। दरअसल, इन याचिकाओं में कहा गया था कि बायोमैट्रिक जानकारी लेना निजता का हनन है। गौरतलब है कि 1950 और 1962 के फैसलों में सुप्रीम कोर्ट ने निजता को मौलिक अधिकार नहीं माना था। केंद्र सरकार ने इससे पहले कोर्ट में यह दलील दी थी कि निजता का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं है।

आय से अधिक संपत्ति मामला: सुप्रीम कोर्ट से शशिकला को 4 साल की सज़ा

आय से अधिक संपत्ति के करीब 20 साल पुराने मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एआईएडीएमके महासचिव वी.के. शशिकला को दोषी पाया और उन्हें 4 साल जेल की सज़ा सुनाई। कोर्ट ने चार साल की सज़ा के अलावा उन पर ₹10 करोड़ का जुर्माना भी लगाया। शशिकला द्वारा ₹10 करोड़ की जुर्माना राशि का भुगतान नहीं करने पर उन्हें 13 महीने और जेल में रहना पड़ सकता है। इस मामले में तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता भी आरोपी थीं। इस आदेश के बाद शशिकला करीब 10 साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगी। गौरतलब है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शशिकला पर अपना फैसला 8 मिनट के भीतर सुना दिया था। शशिकला के जेल जाने के बाद एआईएडीएमके ने उन्हें महासचिव सहित सभी पदों से हटा दिया और उनके द्वारा की गई सभी नियुक्तियों को भी पार्टी ने अवैध घोषित कर दिया।

पहली बार एससी ने वर्तमान जज को माना दोषी, जज करनन को 6 माह की जेल

देश के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट द्वारा किसी जज को सेवाकाल के दौरान सज़ा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने कलकत्ता हाईकोर्ट के जज सी.एस. करनन को अवमानना का दोषी पाते हुए उन्हें 6 महीने की सज़ा सुनाई। कोर्ट ने यह भी कहा कि करनन ने न्यायिक प्रणाली का मज़ाक बना कर रख दिया। हालांकि, कोर्ट ने करनन द्वारा पारित आदेशों संबंधी जानकारी का मीडिया द्वारा प्रकाशित किए जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद पश्चिम बंगाल सीआईडी ने उन्हें 20 जून को तमिलनाडु के कोयंबटूर से गिरफ्तार किया था और 21 जून को उन्हें कोलकाता की प्रेसीडेंसी जेल भेज दिया था। 6 महीने जेल की सज़ा काटने के बाद करनन को 20 दिसंबर को रिहा हो गए। दरअसल, जस्टिस करनन ने प्रधानमंत्री को खुला पत्र लिखकर ‘न्‍यायपालिका में भारी भ्रष्‍टाचार’ पर कार्रवाई करने को कहा था।

जजों के भ्रष्टाचार के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया अपना ही फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश को लेकर जजों के भ्रष्टाचार मामले की सुनवाई पांच-सदस्यीय पीठ को सौंपने के जस्टिस जे. चेलमेश्वर की अध्यक्षता वाली दो-सदस्यीय पीठ का फैसला रद्द कर दिया। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पांच-सदस्यीय पीठ ने कहा कि अलग-अलग मामलों की सुनवाई के लिए पीठ गठन का अधिकार मुख्य न्यायाधीश का है। सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने यह भी कहा कि शिकायत अपने खिलाफ होने पर भी देश के मुख्य न्यायाधीश ही सुनवाई के लिए जजों के नाम तय करेंगे। पीठ ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश का कद ‘हितों के टकराव’ के सिद्धांत से परे है। बतौर रिपोर्ट्स, जजों के नाम पर हुई घूसखोरी को लेकर मुख्य न्यायाधीश पर सवाल उठे हैं।

महिला को गर्भपात के लिए पति की सहमति ज़रूरी नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वयस्क महिला को गर्भपात के लिए पति की सहमति की ज़रूरत नहीं है। कोर्ट ने यह फैसला पत्नी से अलग हो चुके एक शख्स की याचिका पर सुनाया। देश के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि एक मानसिक रूप से विक्षिप्त महिला को भी गर्भपात कराने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि महिला को यह पूरा अधिकार है कि वह बच्चे को जन्म देना चाहती है या फिर गर्भपात कराना चाहती है।

निर्भया केस में सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखी चारों दोषियों की फांसी

सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने 2012 के ‘निर्भया’ गैंगरेप और हत्या केस में चारों दोषियों की फांसी की सज़ा बरकरार रखी। कोर्ट ने इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ केस माना। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस कठोर सज़ा से समाज में भरोसा पैदा होगा। कोर्ट ने कहा कि जो क्रूरता दोषियों ने पीड़िता के साथ की, वह कभी सुनी नहीं गई और ऐसे जघन्य अपराध के लिए माफी हरगिज़ नहीं दी जा सकती। गौरतलब है कि ट्रायल अदालत ने चारों- मुकेश, पवन, विनय शर्मा और अक्षय कुमार सिंह को मौत की सज़ा सुनाई थी जिसे दिल्ली हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा था।

जनप्रतिनिधियों पर चल रहे केस निपटाने के लिए बनें विशेष अदालतें: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह फास्ट ट्रैक कोर्ट की तर्ज़ पर सांसदों व विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों के जल्द निबटारे के लिए विशेष अदालतों का गठन करे। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि हाईकोर्ट के साथ परामर्श कर राज्य सरकारें फास्ट-ट्रैक अदालतों की स्थापना करेंगी और यह सुनिश्चित करेंगी कि वे 1 मार्च, 2018 से काम करना शुरू कर दें। केंद्र ने इसके जवाब में कहा कि इसकी योजना तैयार कर ली गई है और इसके लिए ₹7.80 करोड़ आवंटित किए गए हैं।

रेप के दो मामलों में राम रहीम दोषी करार, मिली 20 साल की सज़ा

हरियाणा के पंचकुला में सीबीआई की विशेष अदालत ने रेप के दो मामलों में डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख राम रहीम को दोषी करार देते हुए 10-10 साल जेल की सज़ा सुनाई जिसे उन्हें अलग-अलग भुगतना होगा। इसके अलावा, राम रहीम पर ₹30 लाख जुर्माना लगाया गया जिसमें से पीड़िताओं को ₹14-14 लाख मुआवज़ा दिया जाएगा। राम रहीम के खिलाफ रेप केस में फैसला सीबीआई स्पेशल कोर्ट के जज जगदीप सिंह सुनाया। गौरतलब है कि सीबीआई अदालत द्वारा राम रहीम को सज़ा सुनाए जाने के बाद 25 अगस्त को भड़की हिंसा और आगजनी में 36 लोगों की मौत हो गई थी जिसके बाद पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने संपत्ति को पहुंचे नुकसान को राम रहीम की संपत्ति से वसूलने के आदेश दिए थे। दोनों पीड़िताओं ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में भी अपील कर राम रहीम के लिए आजीवन कारावास की मांग की है।

2008 आरुषि-हेमराज मर्डर केस: राजेश और नूपुर तलवार को हाईकोर्ट ने बरी किया

आरुषि-हेमराज मर्डर केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 अक्टूबर को राजेश और नूपुर तलवार को बरी कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि इस केस में ट्रायल कोर्ट के जज ने एक फिल्म डायरेक्टर की तरह बिखरे हुए सबूतों को समेटने की कोशिश की लेकिन तथ्यों पर ध्यान नहीं दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि संदेह कितना भी गहरा हो लेकिन सबूतों की जगह नहीं ले सकता। दरअसल, आरुषि के माता-पिता तलवार दंपति ने सीबीआई कोर्ट द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सज़ा के खिलाफ अपील की थी। गौरतलब है कि 15-16 मई, 2008 की रात को आरुषि की लाश नोएडा स्थित घर में और अगले दिन हेमराज की लाश छत पर मिली थी। हालांकि, राजेश तलवार और नूपुर तलवार को बरी करने के फैसले के खिलाफ हेमराज की पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की है।

2जी घोटाला केस में राजा, कनिमोढ़ी समेत सभी आरोपी बरी

2जी स्पेक्ट्रम घोटाला केस में सीबीआई की विशेष अदालत ने 21 दिसंबर को मुख्य आरोपी ए. राजा और कनिमोढ़ी समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया। बरी हुए सभी 25 आरोपियों को ₹5-₹5 लाख का बेल बॉन्ड भरना होगा। कोर्ट ने अभियोजन पक्ष को आरोप साबित करने में बुरे तरीके से नाकाम बताया और कहा कि सुनवाई के आखिरी दौर में आरोप साबित करने के लिए कानूनी तौर पर मान्य सबूतों की ज़रूरत होती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि चार्जशीट में दाखिल किए गए कई तथ्य सही नहीं थे और किसी केस के हाई प्रोफाइल हो जाने से आरोपियों को बिना सबूत दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। इस मामले पर फैसला देने वाले सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ओ.पी. सैनी ने कहा है कि गर्मी की छुट्टियों सहित वह 7 वर्षों से कोर्ट में कानूनी रूप से वैध सबूत लाने वाले का इंतज़ार करते रहे लेकिन सब व्यर्थ रहा। उन्होंने कहा कि यह दिखाता है कि हर कोई अफवाह और अटकलों से बनी धारणा से चल रहा था। हालांकि, केस में आरोपियों को बरी किए जाने के बाद सीबीआई और ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगे। सीबीआई ने कहा कि ऐसा लगता है कि आरोपों को साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए सबूतों को अदालत ने उस दृष्टिकोण से स्वीकार नहीं किया जिससे उन्हें पेश किया गया था। गौरतलब है कि कैग ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि इस घोटाले की वजह से देश को करीब ₹ 1,76,000 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा।

चारा घोटाले के एक मामले में लालू यादव दोषी करार, 3 को होगी सज़ा

चारा घोटाले के एक केस में रांची सीबीआई कोर्ट ने 23 दिसंबर को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव समेत 15 को दोषी करार दे दिया गया। हालांकि, लालू को 3 जनवरी को सज़ा सुनाई जाएगी, तब तक वह पुलिस हिरासत में रहेंगे। वहीं, कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा समेत 7 को इस मामले में बरी कर दिया। रांची सीबीआई कोर्ट ने लालू को देवघर (झारखंड) कोषागार से अवैध रूप से करीब ₹95 लाख निकालने के मामले में दोषी करार दिया है। दरअसल, करीब ₹900 करोड़ के चारा घोटाला मामले में नकली बिलों का प्रयोग कर पशुओं के नाम पर सरकारी खज़ाने से पैसे निकालने का आरोप है। बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा है कि वह इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे।

अदालत ने लगाया पटाखों पर बैन

दिल्ली एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने इस साल अक्टूबर में पटाखों की बिक्री पर बैन लगाया था। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि सांस लेने का अधिकार सबको है। वहीं, मामला सुप्रीम कोर्ट में जाने पर कोर्ट ने पटाखों की बिक्री पर रोक लगाने के अपने फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि कोर्ट को दुख है कि इस मामले को कुछ लोगों ने सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की। कोर्ट ने आगे कहा कि दिल्ली-एनसीआर में रात 11 बजे के बाद पटाखे जलाने की इजाज़त नहीं होगी।

रेयान मर्डर केस के नाबालिग आरोपी पर वयस्क की तरह चलेगा मुकदमा

जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने 20 दिसंबर को रेयान स्कूल मर्डर केस को ‘क्रूरतम’ अपराध बताते हुए 16 वर्षीय नाबालिग आरोपी पर वयस्क की तरह मुकदमा चलाने का आदेश दिया। गुरुग्राम (हरियाणा) स्थित रेयान इंटरनैशनल स्कूल की 11वीं कक्षा के छात्र पर दूसरी कक्षा के 7 वर्षीय छात्र प्रद्युम्न की 8 सितंबर को गला रेतकर हत्या करने का आरोप है। इससे पहले, प्रद्युम्न के पिता वरुण ठाकुर ने कहा था, “हम चाहते हैं आरोपी के लिए सख्त सज़ा हो, उस पर बालिग की तरह कार्रवाई हो और फांसी मिले।” मामले की जांच के दौरान सीबीआई ने स्कूल के 11वीं के एक छात्र को हिरासत में लेने के बाद कहा था कि प्रारंभिक जांच के मुताबिक, छात्र ने परीक्षा और पैरेंट-टीचर्स मीटिंग टलवाने के लिए प्रद्युम्न की हत्या की थी।

न्याय व्यवस्था के अन्य महत्वपूर्ण फैसले

इसके अलावा, 18 वर्ष से कम आयु की पत्नी के साथ यौन संबंध बनाने को रेप मानना, हिंदू मैरिज ऐक्ट की धारा 13B(2) के तहत तलाक के लिए 6 महीने का इंतज़ार करना अनिवार्य नहीं होना और गौरक्षकों की हिंसा रोकने के लिए सभी राज्यों को टास्क फोर्स बनाने का आदेश देने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले भी इस वर्ष चर्चा में रहे।

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