3 फीट से कम कद की मिनी अग्रवाल MPPSC में सिलेक्ट हाेकर बनी अफसर, होते थे भद्दे कमेंट, जानें कहानी…

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मध्य प्रदेश के ग्वालियर की रहने वाली 28 साल की मिनी अग्रवाल ने जो कर दिखाया है वो शायद कोई सोच भी नहीं सकता। मिनी का चयन मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सहायक संचालक उद्योग के पद पर हुआ है। 2.5 फीट की मिनी ने एमपीपीएससी में सफलता हासिल कर फिर साबित किया कि पंखों से नहीं हौसलों से उड़ान होती है, मंजिलें उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है। मिनी को दिव्यांग कैटेगरी में छठी रैंक हासिल हुई है। मिनी 10वीं और 12वीं की परीक्षा में प्राइवेट परीक्षार्थी के रूप में शामिल हुईं और अच्छें अंकों से पास हुईं। लेकिन इसके बाद शारीरिक अक्षमता के कारण मिनी ने पढ़ाई से 3 साल के लिए ब्रेक ले लिया और फिर उन्होंने बी.कॉम में एडमिशन ले लिया। हालांकि इस दौरान उनका फिजियोथेरेपी जारी रहा। इसके बाद मिनी ने निर्माण आईएएस कोचिंग ज्वाइन कर लिया और पहले ही प्रयास में 2012 में वह सब रजिस्ट्रार के वेटिंग लिस्ट में आ गईं। आखिरकार, इस बार उनका चयन सहायक संचालक उद्योग के पद पर हुआ है।

संघर्ष से भरा जीवन…

पेशे से व्यवसायी पिता हरी अग्रवाल की बेटी मिनी के बचपन से ही पैर मुड़े हुए थे। इसलिए कद नहीं बढ़ा। मिनी को स्कूल से पीएससी में चयन तक छोटे कद पर भद्दे कमेंट सुनने को मिले। उनके साथी छात्र-छात्राओं ने उनका मजाक बनाया। बकौल मिनी, “ऐसी बातें सुनकर दुख जरूर होता था, लेकिन मेरा हौसला नहीं टूटा। मैंने कमजोरी को ही अपनी ताकत बनाया।” मिनी अग्रवाल ने कहा, “मेरी नि:शक्तता को लेकर लोगों ने मुझ पर खूब पत्थर फेंकें और मैंने उन्हीं पत्थरों से इमारत बना ली। पिता ने 12 साल की उम्र में पैर का पहला ऑपरेशन कराया। इसके बाद अगले 10 साल में उसके पैरों के 4 मेजर ऑपरेशन हुए। साल 2000 से 2010 तक मिनी का वक्त बिस्तर पर ही बीता। बीच-बीच में चलने फिरने का मौका मिला तो उन्होंने पढ़ाई पर ध्यान लगाया और स्कूलिंग पूरी की। स्कूल में कम हाइट की वजह से बच्चे चिढ़ाते थे। लेकिन उन्होंने पढ़ाई बंद नहीं की।

मिनी ने बताया कि उनके पिता कहते थे, “बेटा तुम्हें मेरा अफसर बनकर मेरा सपना पूरा करना है।” मिनी के मन में भी अफसर बनकर समाज को बदलने की सोच घर कर गई थी। इसलिए ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने एमपी पीएससी की तैयारी शुरू कर दी। 2014 में पहले जब लेबर इंस्पेक्टर पद के लिए सेलेक्शन हुआ तो मिनी के हौसले ने नई करवट ली। उन्होंने यहां से सफर फिर शुरू किया। दोबारा तैयारी की और इस बार उनका चयन सहायक संचालक उद्योग के पद पर हुआ है।

क्या कहते हैं निर्माण आईएएस ग्वालियर के डायरेक्टर संजय गुप्ता…

निर्माण आईएएस ग्वालियर के डायरेक्टर संजय गुप्ता का कहना है कि मिनी ने सफलता हासिल कर न सिर्फ दिव्यांगों के लिए उदाहरण पेश किया है बल्कि छोटे कद की वजह से जिनमें हीन भावना आ जाती है, ऐसे युवाओं को भी सफलता हासिल करने के लिए प्रेरित किया है। गुप्ता ने कहा कि मिनी सीढ़ियां नहीं चढ़ पाती थीं और इसके लिए उन्हें दूसरों का सहारा लेना पड़ता था लेकिन उन्होंने पूरे ग्वालियर का नाम रोशन किया है और अब वह दूसरों के लिए सहारा बनेंगी। इस पल को अनुपम खुशी का पल बताते हुए गुप्ता ने कहा कि करीब एक दशक तक बिस्तर पर रहने के बावजूद अपनी जीवटता से शारीरिक परेशानियों को धता बताते हुए मिनी जिस तरह से मध्यप्रदेश सिविल सेवा में चयनित हुई हैं वो काबिले-तारीफ है।

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