बिटकॉइन कंप्यूटर कोड से बनी डिजिटल करेंसी है जो किसी बैंक या सरकार से संबंधित नहीं है और इसमें ट्रांज़ैक्शन करने वालों का ब्योरा नहीं होता है। हालांकि, ‘माइनर्स’ (टेक्नोलॉजी के जानकार) ट्रांज़ैक्शंस को कॉम्प्लेक्स कैलकुलेशन के ज़रिए सिक्योर नेटवर्क ‘ब्लॉकचेन’ बनाकर वेरिफाई करते हैं। माइनर्स को उनकी सेवाओं के लिए बिटकॉइन मिलते हैं और यह प्रक्रिया चलती रहती है।

क्या होता है बिटकॉइन और कैसे किया जाता है इसे विकसित?

2009 में विकसित की गई बिटकॉइन एक डिजिटल करेंसी है जिसमें कंप्यूटर कोड्स होते हैं और हर बार इसका मालिक बदलते ही इस पर डिजिटल साइन किए जाते हैं। इन अज्ञात लेनदेन को “माइनर्स” यानी बिटकॉइन बनाने वाले सत्यापित करते हैं, जो जटिल गणनाओं के ज़रिए एक सुरक्षित नेटवर्क “ब्लॉक चेन” बरकरार रखते हैं। इसके बाद माइनर्स अपनी सेवाओं के लिए बिटकॉइन लेते हैं और क्रिप्टोकरेंसी विकसित करने का चक्र चलता रहता है। हालांकि, अभी तक उस व्यक्ति या समूह की पहचान नहीं हो पाई है जिसने बिटकॉइन शुरू किया था।

बिटकॉइन ने साल भर में तय किया $1000 से $20,000 तक का सफर

2017 की शुरुआत $1000 के स्तर से करने वाला बिटकॉइन 29 नवंबर को पहली बार $10,000 के पार पहुंचा। इस स्तर को छूने के बाद बिटकॉइन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और महज़ 12 घंटे में $11,000 पर पहुंच गया। क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन की कीमत $11,000 पर पहुंचने के साथ ही चलन में मौजूद कुल बिटकॉइन का बाज़ार मूल्यांकन $190 अरब हो गया जो अरबपति बिल गेट्स ($90 अरब) और वॉरेन बफेट ($83 अरब) की कुल नेटवर्थ $173 अरब से ज़्यादा था। इसके बाद 6 दिसंबर को बिटकॉइन ने $12,000 का स्तर भी हासिल कर लिया। हालांकि इसके बाद यह टूटा लेकिन बहुत समय के लिए नहीं। महज़ 15 दिन बाद बिटकॉइन ने $20,000 का स्तर भी छू लिया।

बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी को भारत में नहीं है मान्यता

भारत में सरकार और आरबीआई ने बिटकॉइन समेत किसी भी क्रिप्टोकरेंसी को मान्यता नहीं दी हुई है बल्कि आरबीआई इसमें निवेश करने वालों को तीन बार चेतावनी भी दे चुका है। वहीं, आयकर विभाग ने भी देशभर में बिटकॉइन एक्सचेंजों का निरीक्षण कर इसके निवेशकों की जानकारी जुटाई है और बतौर रिपोर्ट्स 20 लाख में से करीब 5 लाख धनाढ्य बिटकॉइन निवेशकों को नोटिस भेजकर उनसे इसमें निवेश के स्त्रोत के बारे में भी पूछ चुका है। वहीं, पूंजी बाज़ार नियामक सेबी का कहना है कि इसके बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए इसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है। गौरतलब है कि सरकार बिटकॉइन को लेकर आरबीआई और सेबी के साथ काम कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार बिटकॉइन की तर्ज पर अपनी क्रिप्टोकरेंसी लाने की योजना बना रही है और इस प्रस्ताव पर सरकारी अधिकारियों की समिति ने चर्चा भी की है। बतौर रिपोर्ट्स, इस क्रिप्टोकरेंसी का नाम ‘लक्ष्मी’ रखा जा सकता है।

दुनिया भर में बढ़ने लगा बिटकॉइन का इस्तेमाल

सिंगापुर में देश का पहला कैशलेस कैफे खुला जो बिटकॉइन, डुकाटस समेत अन्य क्रिप्टोकरेंसी में भुगतान लेता है। यह कैफे खोला है क्रिप्टोकरेंसी माइन करने वाली कंपनी डुकाटस ग्लोबल ने। वहीं, जापान की एक दिग्गज कंपनी जीएमओ इंटरनेट ग्रुप ने बताया कि वह फरवरी 2018 से अपने कर्मचारियों को वेतन का कुछ हिस्सा बिटकॉइन में देगी। हालांकि यह कर्मचारियों की मर्ज़ी पर निर्भर होगा कि उन्हें बिटकॉइन में वेतन चाहिए या नहीं लेकिन बिटकॉइन का विकल्प चुनने वालों को 10% अधिक वेतन दिया जाएगा। वहीं, मनी लॉन्डरिंग में भी इसके इस्तेमाल के कई मामले सामने आए और हैकरों ने भी बिटकॉइन में ही फिरौती मांगी।

बिटकॉइन व अन्य क्रिप्टोकरेंसी पर विभिन्न देशों की राय है जुदा

अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, यूरोप, दक्षिण कोरिया और फ्रांस के केंद्रीय बैंकों ने इसमें आने वाले ज़बरदस्त उतार-चढ़ाव को देखते हुए लोगों को इसमें निवेश के प्रति सावधान रहने को कहा है। रूस के केंद्रीय बैंक ने कहा, “हम निजी मुद्रा के पूरी तरह खिलाफ हैं फिर वह भौतिक रूप में हो या फिर वर्चुअल रूप में।” जर्मनी का कहना है कि ब्लॉकचेन में डिपाज़िट से बैंकों के कारोबारी मॉडल पर असर पड़ेगा, जिससे मौद्रिक नीति प्रभावित होगी।

इसके विपरीत, कई देशों के केंद्रीय बैंकों ने इसे भविष्य बताकर इसके इस्तेमाल पर सकारात्मक रुख अपनाया है। पीपल्स बैंक ऑफ चाइना ने कहा है कि क्रिप्टोकरेंसी पर उसका पूरा नियंत्रण है और अब इस टेक्नोलॉजी को अपनाने का समय आ गया है। बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर मार्क कार्नी ने क्रिप्टोकरेंसी को वित्त के क्षेत्र में संभावित ‘क्रांति’ बताया है।वहीं, बैंक ऑफ जापान के गवर्नर ने कहा कि ऐसी डिजिटल करेंसी जारी करने की उनकी कोई योजना नहीं है लेकिन वह क्रिप्टोकरेंसी के बारे में अपनी जानकारी बढ़ाएगा। गौरतलब है कि क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल को लेकर ब्राज़ील, यूके और नीदरलैंड्स का रुख सबसे सकारात्मक है बल्कि नीदरलैंड्स का केंद्रीय बैंक दो साल पहले अपनी क्रिप्टोकरेंसी भी पेश कर चुका है।

क्रिप्टोकरेंसी पर पाबंदी की मांग कर रहे हैं अर्थशास्त्री व दिग्गज

विश्व के शीर्ष अरबपतियों में से एक वॉरेन बफेट ने क्रिप्टोकरेंसी को मज़ाक बताते हुए लोगों को इससे दूर रहने की सलाह दी है। वहीं, अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री जोसेफ स्टिग्लिट्ज़ ने कहा है कि बिटकॉइन को “कानूनी रूप से अवैध” घोषित कर देना चाहिए क्योंकि इसका सामजिक स्तर पर कोई उपयोग नहीं है। अमेरिकी निवेश प्रबंधन कंपनी वैनगार्ड के संस्थापक जैक बोगल ने भी निवेशकों को बिटकॉइन से ‘प्लेग’ की तरह बचने की सलाह दी है।

कई बड़ी हस्तियों ने भी किया हुआ है बिटकॉइन में निवेश

अभिनेता अमिताभ बच्चन के परिवार ने 2015 में सिंगापुर की कंपनी मेरिडियन टेक में ₹1.6 करोड़ का निवेश किया था, जो अब ₹114 करोड़ हो गया है। मेरिडियन बिटकॉइन में माइक्रोफाइनेंस करने वाली Ziddu.com का परिचालन करती है जिसे लॉन्गफिन कॉर्प ने खरीदा है। इसके बाद बच्चन परिवार को लॉन्गफिन के 2.5 लाख शेयर मिले हैं। वहीं, हॉलीवुड के भी कई बड़े नामों ने बिटकॉइन में निवेश किया हुआ है जैसे अभिनेता एश्टन कुचर और अमेरिकी रैपर व गीतकार नैस। गौरतलब है कि गायक स्नूप डॉग ने भी अपना संगीत बिटकॉइन में बेचने की बात कही थी। वहीं, अमेरिकी गायिका केटी पैरी भी इसके बारे में पूछताछ कर चुकी हैं।

बिटकॉइन का प्रतिद्विंदी रिप्पल भी 2017 में 22,900% चढ़ा

बिटकॉइन की प्रतिद्विंदी करेंसी रिप्पल 22 दिसंबर को $1 का स्तर पार कर $1.38 के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। गौरतलब है कि $52 अरब के बाज़ार पूंजीकरण के साथ विश्व की चौथी सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी रिप्पल में इस साल अभी तक 22,900% तेज़ी आई है। इस तेज़ी की वजह विश्व के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज कॉइनबेस पर रिप्पल की ट्रेडिंग शुरू होने की खबरें हैं।

(Source/ Credit- Inshorts Medialabs Pvt. Ltd.)

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