लिखने पर उंगलियों में दर्द राइटर्स क्रैम्प बीमारी का हो सकता है लक्षण, ऐसे हो सकता है ठीक, लापरवाही न करें…

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लिखने पर उंगलियों में दर्द या जकड़न कुछ लोगों को परेशान करता है और इसे अकसर नज़रअंदाज़ किया जाता है। लेकिन अगर आपको ऐसी कोई समस्या हो रही है तो लापरवाही न करें क्योंकि ये राइटर्स क्रैम्प के कारण हो सकता है। आइए जानते हैं कि ये समस्या क्या होती है और इसे कैसे ठीक किया जा सकता है।

राइटर्स क्रैम्प यानी लिखने में अंगुलियों में समस्या। 40 वर्ष की आयु के बाद राइटर्स क्रैम्प की संभावना अधिक बढ़ जाती है। इस बीमारी के चलते व्यक्ति को लिखने में समस्या होती है और उसके लिखने की गति धीमी हो जाती है। राइटर्स क्रैम्प के इलाज के लिए जरूरी है कि सबसे पहले उसके लक्षणों को पहचाना जाया क्योंकि इलाज में देरी होने से समस्या बढ़ सकती है।

राइटर्स क्रैम्प से निम्नलिखित परेशानियां होती हैं-

– कलम को ठीक से न पकड़ पाना
– लिखने में समस्या
– लिखने की गति धीमी हो जाना
– लिखावट साफ़ न होना
– हथेली व हाथ में दर्द होना
– लिखावट में बदलाव या ठीक न होना
– पहले जैसे लिखावट के तरीके में बदलाव
– रोगी द्वारा लिखे गए अक्षर या शब्द पढ़ने या समझने में परेशानी
– रोगी को अन्य कामकाज करने में कोई परेशानी नहीं होती

इसके कारण व्यक्ति को लिखने में समस्या, लिखावट ठीक न होने से बैंक से पैसे निकालने में भी परेशानी हो सकती है।

राइटर्स क्रैम्प की समस्या बढ़ने पर अंगुलियों व हाथ से किये जाने वाले अन्य कार्यों में समस्या आने लगती है जैसे-

– चाबी पकड़ना
– ताला खोलने में परेशानी
– दरवाजे के हैंडल को पकड़ने में समस्या
– बर्तन जैसे चम्मच, कप, गिलास पकड़ने में परेशानी
– खाते समय चाकू या कांटा पकड़ने में परेशानी
– किसी भी वस्तु को हाथ से उठाने या पकड़ने में परेशानी

गौरतलब है कि राइटर्स क्रैम्प का इलाज संभव है। इस समस्या में ऑक्यूपेशनल थेरेपी लाभकारी सिद्ध होती है। इसके अलावा दवाओं से भी इसका इलाज किया जाता है। जरुरी है कि राइटर्स क्रैम्प होने पर डॉक्टर को अवश्य दिखाएं।

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