अर्जुन राम मेघवाल: प्रेरणादायक! क्या यात्रा है! बुनकर से आईएएस और अब मोदी की कैबिनेट में मंत्री!

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एक समय जब राजनीति पर पैसा, शक्ति और राजनीतिक विरासत का प्रभुत्व था, अर्जुन राम मेघवाल का जीवन और किये गया संघर्ष एक दिलचस्प और बिलकुल विपरीत तस्वीर प्रस्तुत करता है। बुनकर के परिवार से आने वाले श्री मेघवाल जी पूर्व में एक आईएएस अधिकारी रह चुके है और फिर सांसद होने के साथ साथ मंत्री के पद को सुशोभित कर रहे है।

उनका जन्म किसमी-देसर गांव (बीकानेर) के पारंपरिक बुनकर परिवार में हुआ था, जहां उनकी उम्र का कोई भी छात्र शायद ही कभी स्कूल जाता था।” उन्होंने स्कूल और कॉलेज के दिनों के दौरान अपने परिवार और शिक्षा का समर्थन करने के लिए बुनाई करते थे।”श्री मेघवाल जी की शादी तभी कर दी गयी थी जब वो महज सातवीं कक्षा के छात्र थे। विवाह के बाद, उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और श्री डुंगर कॉलेज, बीकानेर, राजस्थान से (BA) & Law (LLB) में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। वह स्नातकोत्तर करने में भी कामयाब रहे।

“उनके पिता ने उन्हें कड़े शब्दों में चेतावनी दी थी कि अगर वो अपनी किसी भी परीक्षा में विफल रहे तो वे उन्हें अपनी पढ़ाई जारी रखने की अनुमति नहीं देंगे। यह उनके लिए एक बहुत कठिन समय था क्योंकि उनके स्थान पर अध्ययन करने के लिए कोई वातावरण नहीं था। लेकिन उन्होंने कड़ी मेहनत की और पढ़ाई पूरी करने में कामयाब रहे। अपनी नौकरी के साथ, उन्होंने सरकारी नौकरी में उतरने के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना शुरू कर दिया।

आसान नहीं था रास्ता

उन्हें पहली नौकरी भारतीय डाक और टेलीग्राफ विभाग में एक टेलीफोन ऑपरेटर के रूप में मिला। एक टेलीफोन ऑपरेटर के रूप में काम करते हुए, उन्होंने एक ही समय में अपने पिता की मदद करते हुए अपनी एलएलबी की डिग्री भी ली। उन्होंने टेलीफोन यातायात के महासचिव पद के लिए चुनाव लड़ा  और जीते। मेघावाल बताते हैं, “नीतियों और राजनीति के बीच संबंधों को समझने के लिए यह मेरे लिए एक शानदार अवसर था। मैंने कई राज्य स्तरीय बैठक में भाग लिया जिसने मुझे एक अच्छा अनुभव दिया”।

करियर यात्रा 

लिखित परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बाद, वह राजस्थान प्रशासनिक सेवाओं के साक्षात्कार में विफल रहे। वह चौंक गए क्योंकि वह साक्षात्कार को पास करने को ले के थेआश्वस्त थे। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने सफल होने के लिए दृढ़संकल्प के साथ दूसरा प्रयास किया। और वो सफल भी रहे तथा उन्हें राज्य औद्योगिक सेवाओं के लिए चुन लिया गया। इसके बाद, 1994 में, उन्हें राजस्थान के उपमुख्यमंत्री के विशेष ड्यूटी (ओएसडी) अधिकारी के तौर पर रूप में तैनाती की गयी। आगे चलकर उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवाओं में पदोन्नत किया गया और चुरु जिले के जिला कलेक्टर के रूप में नियुक्त किया गया।

चूंकि उन्हें लोगों से बहुत सम्मान मिला, उन्होंने महसूस किया कि उन्हें एक सफल व्यक्तित्व के रूप में देखा जा रहा है और  उनसे एक और बड़ी भूमिका निभाने की उम्मीद की जा रही है। राजनीति सिर्फ इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए मंच था। उन्हें 2009 में भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें बीकानेर क्षेत्र से लोकसभा के लिए टिकट की पेशकश की। वह जीते। उन्होंने इसे एक नयी शरुआत माना। वर्तमान में वे केन्द्रीय जल संसाधन, गंगा विकास, संसदीय कार्य मंत्री तथा पूर्व केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री है।

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