बिहार 10वीं बोर्ड परीक्षा में भाग लेने वाले उम्मीदवार नतीजों का इंतजार कर रहे हैं और बोर्ड की ओर से कल नतीजे जारी किए जाने हैं लेकिन नतीजे जारी होने से एक दिन पहले ही हजारों कॉपियां गायब होने का मामला सामने आया है। दरअसल बिहार के नवादा से 42 हजार कॉपियां जांच के लिए गोपालगंज भेजी गई थीं लेकिन अभी तक साइंस की उन 42 हजार कॉपियों का कोई अता-पता नहीं चला है।

मामला गोपालगंज के एसएस बालिका इंटर स्कूल का है। इस स्कूल के प्राचार्य ने नगर थाना में करीब 213 बैग उत्तर पुस्तिका की कॉपियां गायब होने की प्राथमिकी दर्ज कराई है। इस मामले में प्राचार्य ने स्कूल के ही आदेशपाल और नाइट गार्ड के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई है।

नगर थाना चौक के समीप हजियापुर रोड में स्थित एसएस बालिका इंटर स्कूल के प्राचार्य प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने नगर थाना में आवेदन देकर इस मामले की जांच करने और अपनी जान को खतरा होने की आशंका भी जताई है। प्राचार्य के द्वारा दिए गए आवेदन के मुताबिक एसएस बालिका इंटर स्कूल को बिहार विद्यालय परीक्षा समिति पटना द्वारा मूल्याकंन केंद्र बनाया गया था। को-ऑर्डिनेटर की देख रेख में उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के बाद सभी कॉपियों को स्ट्रॉग रूम में 5 अप्रैल 2018 को रख दिया गया। इसके बाद स्कूल के ही आदेशपाल छठू सिंह द्वारा तालाबंद कर उसको सील कर दिया गया। ईद के दिन 15 जून को बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के कर्मी ने बोर्ड द्वारा कुछ उत्तर पुस्तिकाओं की मांग की। जिन उत्तरपुस्तिकाओं की मांग की गई थी उसमें सामाजिक विज्ञान के दो, हिंदी के दो, संस्कृत के दो, मैथ के दो, विज्ञान के दो और अंग्रेजी के दो समेत कुल 12 उत्तर पुस्तिकाएं शामिल थी।

इस मांग के बाद सभी उत्तर पुस्तिकाओं को बिहार बोर्ड के कर्मी को सौंप दिया गया लेकिन इस उत्तर पुस्तिका में विज्ञान के दो और सामाजिक विज्ञान की कॉपियां स्ट्रॉग रूम से गायब पाई गईं। जब इस दो विषयों की उत्तर पुस्तिका के लिए स्ट्रॉग रूम में रखे पूरे बंडल की जांच की गयी तो पता चला यहां से हिंदी के 13 बैग, लिटरेचर के 3 बैग, इंग्लिश , उर्दू , साइंस , सोशल साइंस सहित कई विषयों की कुल 213 बैग और अन्य उत्तर पुस्तिका भी गायब है. ऐसी आशंका है की गायब उत्तर पुस्तिकाओं की संख्या 10 हजार से ऊपर होगी।

बहरहाल, नगर थाना पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर मामले की छानबीन शुरू कर दी है। नगर थाना में पदस्थापित एसआई अरुण कुमार सिंह के मुताबिक स्कूल के प्राचार्य के बयान पर थाना कांड संख्या 295/18 दर्ज कर लिया गया है जिसमें धारा 381/ 120 बी आइपीसी के तहत केस दर्ज किया गया है।

बिहार बोर्ड मैट्रिक रिजल्ट के मेधा सूची में शामिल मेधावी छात्रों के कॉपी की दुबारा जांच की जानी थी। इसको ले कर बोर्ड ने 67 कर्मचारियों की टीम बनाई गई थी। इन सभी कर्मचारियों को 38 जिलों में बनाये गए मूल्यांकन केंद्र पर 15 जून को भेजा गया था। जिन जिलों में अधिक मूल्यांकन केंद्र था वहां पर दो से तीन कर्मचारी गए थे। ज्ञात हो कि मेधा सूची में शामिल टॉप 25 मेधावी छात्रों की कॉपी की जांच के लिए बोर्ड में एक्सपर्ट की टीम विषय वार बनाए गए थे। एक्सपर्ट ने 16 जून को पहले कॉपी की दुबारा जांच की। 2016 में टॉपर घोटाला और 2017 में गणेश कुमार जैसे फर्जी छात्रों के कारण बोर्ड ने वेरिफिकेशन का काम शुरू किया है।

अब बोर्ड के सामने सवाल यह है कि इन मेधावी छात्रों का वेरिफिकेशन कैसे होगा। बिहार बोर्ड अब इन मेधावी छात्रों की शेष कॉपियों के आधार पर ही लिखावट आदि का वेरिफिकेशन कर रहा है। रिजल्ट से एक दिन पहले कॉपियां गायब होने से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर परीक्षा के नतीजे जारी कैसे होंगे? साथ ही रिजल्ट जारी होने के बाद अगर कोई परीक्षार्थी अपनी कॉपी री-चेक जांच के लिए आवेदन करता है तो उसकी क्रॉस चेकिंग कैसे होगी? वहीं दो दिन पहले बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष ने दावा किया था कि दसवीं के नतीजों में बारहवीं की तरह गड़बड़ी नहीं होने दी जाएगी।

बता दें कि बोर्ड ने 10 बोर्ड परीक्षा का आयोजन 21 फरवरी से 28 फरवरी के बीच किया था। साथ ही प्रेक्टिकल परीक्षाएं 22 जनवरी से 24 जनवरी के बीच करवाई गई थीं। इस साल बिहार बोर्ड 10वीं की परीक्षा 17.70 लाख छात्रों ने दी थी जो 1,426 परीक्षा केंद्र पर आयोजित की गई थी। वहीं 6 जून को बिहार बोर्ड ने कक्षा 12वीं का रिजल्ट जारी किया था जिसमें 52.95 फीसदी छात्र पास हुए थे।

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