वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर के पद पर तैनात अवनी चतुर्वेदी लड़ाकू विमान अकेले उड़ाने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं। अवनी ने सोमवार को गुजरात के जामनगर वायुसेना स्टेशन से मिग-21 बाइसन विमान उड़ाया। गौरतलब है कि अवनी उन तीन महिला अधिकारियों में से एक हैं जिन्हें वर्ष 2016 में बतौर पायलट वायुसेना में शामिल किया गया था। लड़ाकू विमान उड़ाने के लिए तीन महिला पायलट अवनी चतुर्वेदी, भावना कांत और मोहना सिंह को कड़ा प्रशिक्षण दिया गया है।

इससे पहले दुनिया में सिर्फ ब्रिटेन, अमेरिका, इजरायल और पाकिस्तान में ही महिलाएं फाइटर पायलट बन सकती थीं। भारत सरकार ने महिलाओं को 2015 में फाइटर पायलट के लिए अनुमति दी थी। देश में 1991 से ही महिलाएं हेलिकॉप्टर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट उड़ा रही हैं, लेकिन फाइटर प्लेन से उन्हें दूर रखा जाता था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 28 जनवरी को अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में महिलाओं के मुद्दे पर चर्चा करते हुए अवनी की उपलब्धि का जिक्र किया था। पीएम ने कहा था कि तीन बहादुर बेटियां भावना कांत, मोहना सिंह और अवनी चतुर्वेदी फाइटर पायलट बनी हैं और सुखोई विमान उड़ाने का प्रशिक्षण ले रही हैं।

अवनी मूल रूप से मध्यप्रदेश के रीवा की रहने वाली हैं। अवनी का जन्म 27 अक्टूबर 1993 को हुआ था। उनके पिता एग्जीक्यूटिव इंजीनियर हैं और भाई आर्मी में कैप्टन हैं। वहीं, चाचा सहित परिवार के कई सदस्य आर्मी में हैं। इंडियन एयरफोर्स में शामिल होने के बाद अवनी ने बताया था कि इस वजह से उसने आर्मी की लाइफ को करीब से देखा है और उसे यह लाइफ पसंद है। अवनी ने कहा था, “हर कोई बचपन में आसमां की तरफ देखता है और चाहता है कि पंछी कि तरह उड़े। अब एयरफोर्स में उन्हें मिलिट्री लाइफ के साथ उड़ने का मौका भी मिल रहा हैं।”

अवनी की मां सविता ने एयरफोर्स में बेटी के चयन के बाद कहा था कि उन्हें इस बात की जानकारी ही नहीं थी कि अवनी ने एयरफोर्स के लिए आवेदन दिया हैं। उसका चयन होने पर ही परिजनों को इस बारे में जानकारी मिली थीं। बेटी की इस कामयाबी के पीछे मां अपने बेटे और अवनी के भाई को प्रेरणा बताती है। अवनी ने कल्पना चावला को अपनी प्रेरणा स्त्रोत मानते हुए अपने जीवन को आगे बढ़ाया। पिता बताते हैं कि उनकी बेटी बचपन से ही मेधावी थी और वह अच्छी पुस्तकें पढ़ती रहती थीं।

राजस्थान के वनस्थली में बीटेक करने के दौरान ही अवनी ने एयरफोर्स का फार्म भरा था। वहीं उसका चयन आईबीएम में भी हो गया था लेकिन कुछ दिन सर्विस करने के बाद वहां से काम छोड़कर एयरफोर्स ज्वाइन कर लिया।

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