रोहित सिंह

बच्चों को पोषक पदार्थों की उपलब्ध्ता को लक्षित करते हुए राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की सरकारों ने अपनी मिडडे मील योजनाओं के लिए फोर्टिफ़ाइड तेल का प्रयोग प्रारंभ किया है। वहीं, पश्चिम बंगाल तथा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह अब सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से फोर्टिफ़ाइड गेहूं के आटे का वितरण कर रह है।

फोर्टिफिकेशन का उद्देश्य: भोज्य पदाथों के फोर्टिफिकेशन का लक्ष्य कुपोषण से लड़ना है।

फोर्टिफिकेशन से तात्पर्य

.फोर्टिफिकेशन के तहत महतवपूर्ण तत्वों विटामिन और खनिज तत्वों जैसे आयरन, आयोडीन, जिंक, विटामिन A और D को भोज्य पदाथों जैसे चावल, दूध एवं नमक में मिलाया जाता है ताकि इनके पोषक तत्वों मैं वृद्धि हो सके।

· प्रोसेसिंग से पहले पोषक तत्व नहीं भी हो सकते हैं।

· यह एक सामान्य, प्रामाणिक, किफायती और सम्पूरक रणनीति है जिसका प्रयोग पुरे विश्व में किया जा रहा है।

· फ़ूड सेफ्टी एंड स्टैण्डर्ड रेगुलेशन 2016 के ड्राफ्ट में चावल, दूध, नमक और तेल के फोर्टिफिकेशन हेतु मानक भी निर्धारित किये गए हैं।

FSSAI द्वारा उठाए गए कदम

· भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पिछले वर्ष कई मानकों का एक सेट और एक लोगो (logo) जारी किया है। उसका फोकस जागरूकता और आम सहमति-निर्माण पर है।

· FSSAI छोटे स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं जैसे स्थानीय अाटा पीसने वाली मीलों, को प्रीमिक्सड मिक्रोनुट्रिएंट्स हेतु प्रोत्साहित करने का कार्य कर रहे हैं।

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