बेटियां बेटों से कम नहीं होती, इस बात का जीता जागता मिसाल बनी हैं दो बहनें… उत्तर प्रदेशी की पीलीभीत की रहने वाली दो बहनों- हनी और हंसी की याददाश्त खूब तेज है। देश-दुनिया से जुड़ा कुछ भी पूछिए, जवाब तुरंत मिलेगा। एकदम सर्च इंजन की तरह। इंडिया की सुपरफास्ट मेमोरी मशीन के नाम से प्रसिद्ध दोनों बहनों को सबसे कम उम्र में सामान्य ज्ञान की असीमित जानकारी जुटाने का गौरव हासिल है। हनी 12 साल की हैं तो हंसी 9 साल की। ये तीन मिनट में सभी राज्यों समेत दुनिया के कई देशों की राजधानी बता देंगी। सभी देशों के क्षेत्रफल, राष्ट्रगान और रचयिता के नाम, प्रमुख लड़ाइयों सहित ऐतिहासिक घटनाएं इनकी जुबान पर हैं। इतना ही नहीं, दोनों कई क्विज प्रतियोगिताएं भी जीत चुकी हैं और कविताएं भी लिखती हैं। इन्हीं कविताओं के जरिए ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ और ‘स्वच्छता मिशन’ जैसे अभियान के जरिए लोगों को जागरूक भी कर रही हैं।

अच्छी याददाश्त की वजह

हनी और हंसी की याददाश्त यूं ही इतनी तेज नहीं है। दरअसल, दोनों की जनरल नॉलेज और देश-दुनिया में दिलचस्पी भी है। इनकी मां सीमा कुमारी और पिता दिग्विजय सिंह दोनों टीचर हैं, लेकिन उन्होनें कभी दोनों पर यह सब याद करने के लिए जोर नहीं डाला। सीमा बताती हैं कि हनी तीन साल की थी तब उसे अपनी कोचिंग ले जाती थीं। वहां बच्चों को सामान्य ज्ञान के प्रश्न याद करने को देतीं। ज्यादातर स्टूडेंट इन पर ध्यान नहीं देते थे, लेकिन हनी जरूर याद कर लेती थी। वहीं, पिता दिग्विजय सिंह ने बताया कि घर पर बच्चों को ट्यूशन पढ़ाते थे। पहले बड़ी बेटी हनी ने उस दौरान पढ़ाई जाने वाली चीजों को ग्रहण करना शुरू कर दिया। फिर हसी ने भी अनुसरण किया। धीरे-धीरे उसकी दिलचस्पी इन चीजों में बढ़ने लगी और उसने किताबें पढ़नी शुरू कीं। अब वह 53 मिनट में बिना रुके सामान्य ज्ञान के 1600 प्रश्नों के उत्तर दे सकती है। हंसी उससे भी तेज है। वह 20 मिनट में जीके के 800 प्रश्नों के उत्तर दे सकती है।

‘आगे भी नाम रोशन करेंगी’

केजीएमयू के मनोचिकित्सक आदर्श त्रिपाठी का कहना है कि किसी भी बच्चे से जबरन कोई काम नहीं करवाया जा सकता। कोई बचपन से ही इन सब चीजों में आगे होता है तो उस पर या तो जेनेटिक असर होता है या फिर आसपास के माहौल का। अगर हनी और हंसी को ऐसा ही माहौल मिलता रहा तो वे आगे चलकर और भी नाम रौशन करेंगी।

तीन मुख्‍यमंत्र‍ियों से म‍िल चुका है सम्‍मान

अपनी तीक्ष्ण बुद्धि के दम पर पूरे देश में अपनी काबिलियत का डंका बजाने वालीं हनी-हंसी को उत्तर प्रदेश, दिल्ली और उत्तराखंड के सीएम सम्मानित कर चुके हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत और पीएम के भाई सोमा भाई मोदी समेत तमाम हस्तियां बाल प्रतिभाओं की हौसलाअफजाई कर चुके हैं। नेपाली एफएम शो में भी जीनियस बहनों ने टैलेंट दिखाया था। साथ ही नेपाल में बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ अभियान के तहत जागरूकता रैली निकाली थी। दोनों मध्यम वर्गीय परिवार से हैं। ऐसे में माता-पिता को इनके भविष्य की चिंता भी है। पिता का कहना है कि प्रतियोगिताओं के लिए दोनों को जगह-जगह जाना पड़ता है। कुछ न सही तो सरकार परिवहन शुल्क ही कम कर दे।

वैज्ञान‍िक बनना चाहती हैं

हनी बरेली के राधा माधव पब्लिक स्कूल में 8वीं की छात्रा हैं तो हंसी पीलीभीत के बेलसापुर में बालाजी गर्ल्स इंटर कॉलेज में छठी में पढ़ रही हैं। बकौल हंसी, बड़ी बहन हनी ही उसकी सबसे बड़ी प्रतियोगी है। बड़ी बहन की तरह वह भी वैज्ञानिक या आईएएस बनना चाहती हैं।

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