कम समय में कैसे करें क्वालिफाइंग CSAT की तैयारी, नजरअंदाज करने से काफी छात्र होते हैं UPSC प्री से बाहर

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सिविल सेवा के लिए यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा इस वर्ष 18 जून को होगी । इसमें सफल होने वाले उम्मीदवार ही मुख्य परीक्षा में शामिल हो सकते हैं । प्रारंभिक परीक्षा में अब बहुत अधिक समय नहीं शेष बचा है इसलिए छात्रों एक रणनीति बना कर गंभीर अध्ययन शुरू कर देना चाहिए। सी- सैट के प्रश्न पत्र को लेकर प्रायः छात्रों में भय रहता है जबकि वह केवल क्वालिफाईंग हैं, ऐसे में छात्रों को एक रणनीति के तहत इसकी तैयारी करनी चाहिए। आइए जानते हैं कैसे करें सी-सैट की तैयारी…

छात्रों को इस खंड में ज्यादा मेहनत की आवश्यकता नहीं है लेकिन इसे नजरअंदाज करना भी खतरनाक हो सकता है। अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए पिछले परीक्षाओं के प्रश्न पत्रों को हल करना चाहिए। सी-सैट की परीक्षा के लिए इन बातों का हमेशा रखें ध्यान…

  • कॉम्प्रीहेंशन में जो प्रश्न होते हैं उसके द्वारा यूपीएससी अभ्यर्थी की विश्लेषणात्मक क्षमता की परीक्षा करता है इसलिए अभ्यर्थी को अपना विश्लेषणात्मक क्षमता को बढ़ने का प्रयास करना चाहिए । इसके लिए समाचार पत्र के सम्पादकीय पृष्ट को निरंतर पढ़ना लाभदायक होगा।
  • इसकी तैयारी परीक्षा से 3 महीने पहले से ही शुरू कर देनी चाहिए और इसके लिए सबसे पहले अपना सिलेबस औऱ अध्ययन सामग्री एकत्रित कर लें। इसके अलावा समय सारणी का प्रयोग करें जिससे सभी विषयों पर फोकस बना रहेगा। पाठ्यक्रम में दिए सभी खंडों को अपने में समेटने वाली एक अच्छी किताब को चुनें।
  • यूपीएससी सी-सैट के पिछले साल के प्रश्नपत्रों को हल करना किसी भी कीमत पर न भूलें। यह काफी फायदेमंद होगा। इससे चीजों को समझने में मदद मिलेगी और कठिनाई के स्तर का भी पता चलेगा। इसका सबसे बढ़िया तरीका यह है कि बिना किसी व्यवधान के 2 घंटे बैठ करके उसे हल कीजिये ,और अपनी क्षमता को दिखिए। इसके बाद अपनी कमियों का आंकलन कीजिये और पता लगाईये कि किन क्षेत्रो में आप अच्छे अंक प्राप्त नहीं कर पाएं है और किन क्षेत्रो पर कार्य करना है।
  • तैयारी हेतु अच्छी रणनीति अवश्य बनाए, इसके लिए जरूरी है कि सभी विषयों को साथ लेकर चलें और किसी टॉपिक व विषय को पेंडिंग में न डालें।
  • अंग्रेजी, गणित और सामान्य मानसिक योग्यता में अपनी क्षमता को देखते हुए इस पेपर की तैयार के लिए रोजाना 2 से 4 घंटे दीजिए। हिन्दी और गैर–गणीतिय पृष्ठभूमि वाले छात्रों को इस खंड की तैयारी के लिए थोड़ा ज्यादा वक्त देना पड़ेगा। इस दौरान एक पेपर जरूर सॉल्व करें।
  • बुनियादी विषयों पर अपनी पकड़ बनाने के बाद आप सिर्फ अभ्यास प्रश्नपत्रों को हल करना शुरु कर दें। जितना अधिक हो सके उतना सैंपल पेपरों का अभ्यास करें इससे काफी हद तक आप सीसैय में सहज महसूस करने लगेंगे। इसके लिए अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे एसएससी और बैंकिंग परीक्षाओं के प्रश्न पत्रों का भी सहारा ले सकते हैं।
  • सीएसएटी पेपर का सबसे महत्वपूर्ण पहलू समय का प्रबंधन है। अगर आपने पर्याप्त पेपरों का अभ्यास नहीं किया है तो आप परीक्षा में दिए गए समय में इस पेपर को पूरा नहीं कर पाएंगे। स्टाप वॉच के साथ दो घंटे के अवधि में ज्यादा– से– ज्यादा अभ्यास पेपरों को हल करने की कोशिश करें। इससे आपको अपनी स्पीड को बढ़ाने और समय पर पेपर पूरा करने में मदद मिलेगी। आखिरी महीनों में कोशिश करें कि हर दिन आप स्टॉप वाच के साथ एक सैंपल पेपर का अभ्यास करें।

 

  • प्रारंभिक परीक्षा में सी-सैट क्वालिफाई करने के लिए छात्रों को कंप्रीहेंशन में बेहतर तैयारी की आवश्यकता है । नीचे दिए गए टिप्स से छात्रों को मदद मिल सकती है और परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं –
  1. भाषायी कौशल का विकास – कंप्रीहेंशन के प्रश्नों को हल करने के लिए बेहतर भाषायी कौशल की आवश्यकता होती है । कला और मानविकी के छात्रों को विश्वविद्यालयी शिक्षा के दौरान काफी हद तक भाषायी कौशल का विकास करने का मौका मिलता है लेकिन विज्ञान और इंजीनियरिंग के छात्रों को भाषयी कौशल के विकास का कम ही मौका मिल पता है । छात्रों को अपने भाषायी कौशल को बढ़ाने के लिए ऐसे पुस्तकों और लेख को पढ़ना चाहिए जिसकी भाषा प्रभावी और गतिशील हो

  2. भवार्थ को समझना – छात्रों को कोई भी समाचार पत्र ,लेख ,संपादकीय आदि पढ़ते हुए उसके भवार्थ को समझने का कोशिश करना चाहिय । लेखक का किसी भी सम्पादकीय या लेख का मुख्य भाव क्या है ? इस दृष्टि से अध्ययन परीक्षा के लिए लाभदायक और अंकदायी होगा |

  3. जो पढ़े उस पर विचार करें – किसी भी सम्पादकीय या लेख को पढ़ने के बाद अभ्यर्थी को उस पर विचार करना चाहिय । इस रणनीति के द्वारा अपने व्याख्यात्मक क्षमता और मुद्दो की समझ को विकसित की जा सकती है ।

  4. अभ्यास करें – इस खंड में अभ्यास के द्वारा अच्छे अंक प्राप्त किये जा सकते है। सी-सैट के लिए अभ्यास बहुत महत्वपूर्ण है और इसके लिए विगत वर्षों के पेपर और मॉक टेस्ट का सहारा ले सकते हैं। परीक्षा में प्रश्नों के उत्तर देते समय प्रश्न और विकल्प को सावधानीपूर्वक पढ़ें। साथ ही कंप्रीहेंशन के थीम और भाव को समझ कर ही उत्तर देना चाहिए। कंप्रीहेंशन में संगत शब्दों को अंडरलाइन करने से कंप्रीहेंशन के थीम और भाव को समझा जा सकता है। परीक्षा में समय की बजटिंग पहले ही कर लेना चाहिए क्योंकि 2 घंटे में ही 80 प्रश्नों के उत्तर देने होते हैं और कंप्रीहेंशन के प्रश्नों को पढ़ने और उत्तर देने में ही काफी समय लग जाता है।कंप्रीहेंशन का परिक्षण छात्र के अभिवृति के मूल्यांकन हेतु सबसे महत्वपूर्ण पहलु में से एक है ।
  • कंप्रीहेंशन में अलग -अलग क्षेत्र के उद्धरण दिए जाते हैं । ये प्रशासनिक मूल्य ,अधिकारी तंत्र की जबावदेही ,आर्थिक अवधारणाओ ,वैज्ञानिक अनुसन्धान, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की नीति ,वैश्विक तापवृद्धि आदि क्षेत्रों से सम्बंधित होते हैं । इसके लिए समाचार पत्र के सम्पादकीय पृष्ट को निरंतर पढ़ना लाभदायक होगा । साथ ही समसामायिक से जुड़े पत्र-पत्रिकाओं को पढ़ना ,इस खंड के प्रश्नों हल करने में मदद कर सकता हैं ।

  • अंग्रेजी कंप्रिहेंशन

परीक्षा में इस खंड को शामिल करने के पीछे हिंदी माध्यम के छात्रों की अँग्रेजी की समान्य समझ की समीक्षा करना है । । इस खंड के प्रश्नों के माध्यम से लोक सेवकों में अंग्रेजी में लिखित दस्तावेजों को समझने क्षमता का पता लगाया जाता है । इस खंड के प्रश्न सरल होते हैं।

तार्किक क्षमता और रीजनिंग:

  • तार्किक क्षमता में अनुक्रम, नंबर सीरीज, प्रगति, वेन डायग्राम, क्रम परिवर्तन एवं संयोजन से सवाल पूछे जाते हैं। अभ्यर्थी अगर इस भाग में भी दक्षता प्राप्त कर ले तो सफल होने की संभावना बढ़ जायेगी। इसे लिए निरंतर अभ्यास की आवश्यकता होगी। उच्चस्तरीय किताब की सहायता लेना लाभप्रद होगा । रीजनिंग और मानसिक योग्यता की किताबों से अभ्यास करना परीक्षा के दृष्टिकोण से सहायक होगा।

डाटा विश्लेषण और निर्णयन:

  • डाटा विश्लेषण के प्रश्नों को हल करने के लिए अभ्यास की आवश्यकता है । इसके लिए वार्षिक बजट, आर्थिक समीक्षा का अध्ययन लाभदायक होगा ।डाटा विश्लेषण से पूछे जाने वाले सवाल बैंकिंग और एमबीए परीक्षाओं में पूछे जाने वाले सवालों से अलग होते हैं। निर्णयण के सवाल अनिवार्य होते हैं और इसमें नकारात्मक अंक नहीं होता । हर विकल्प के कुछ ना कुछ अंक ( सबसे ज्यादा 100 % और सबसे कम 25%)होते हैं ।निर्णयन के लिए सामान्यत: तीन चरण होते है- प्रथम चरण में समस्या का निर्धारण किया जाता है, दूसरे चरण में समस्या के समाधान के लिए विकल्पों का विकास किया जाता और तीसरे चरण में सबसे अच्छे विकल्प को निर्णयण के रूप में चुन लेते है । इस रणनीति के द्वारा परीक्षा मे बेहतर प्रदर्शन किया जा सकता है।

 

अगर आप इस पेपर की तैयारी में पर्याप्त समय लगाते हैं और सटीक रणनीति का अनुसरण करते हैं तो यह परीक्षा आपके लिए बेहद आसान हो जाएगी।  इसके लिए हमेशा आत्मविश्वाश बनाएं रखें , मोटीवेट होतें रहें।

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