UPSC 2017: 1 महीने में कैसे करें भूगोल की तैयारी, जानें ये अहम टिप्स, प्री और मेंस में आएंगे अच्छे मार्क्स…

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हाल के वर्षों में सिविल सेवा की परीक्षा हेतु उपलब्ध विभिन्न वैकल्पिक विषयों के पाठ्यक्रमों में अत्यधिक बदलाव हुए हैं एवं इस बदलाव के पश्चात ‘भूगोल’ विषय की लोकप्रियता एक वैकल्पिक विषय के रूप में काफी तेजी से बढ़ी है। पिछले कुछ वर्षों के सफल प्रत्याशियों के वैकल्पिक विषयों के सर्वेक्षण से यह स्पष्ट हो जाता है कि इस विषय की लोकप्रियता का एक सबसे महत्वपूर्ण कारण इसका संकल्पना आधारित होना है। एक बार समझ विकसित हो जाने पर इस विषय में रटने की आवश्यकता नहीं पड़ती। वस्तुतः भूगोल को आज ‘कला’ में ‘विज्ञान’ भी कह सकते हैं। यही कारण है कि इस विषय में अच्छे अंकों की संभावना कला विषयों में सबसे अधिक है।

पिछले कुछ सालों मे परीक्षा में पूछे जा रहें प्रश्नों मे बद्लाव आया है। यूपीएससी आईएएस प्राथमिक परीक्षा में, भूगोल से आने वाले प्रश्नों की संख्या हाल के दिनों में कम हुई है। पिछले 4 वर्षों में, 2014, 2015 और 2016 में भूगोल भाग से क्रमशः 20, 14 और 12 प्रश्न आये। छात्रों को ज्ञान के विस्तार के साथ टॉपिक की समझ बनानी चाहिए। भूगोल का मुख्य लाभ यह है कि यह पर्यावरण के हिस्से के साथ ओवरलैप करता है और सवाल ज्यादातर सैद्धांतिक होते हैं, अत: यदि आप इसके सिद्धांत को जानते हैं, तो आप आसानी से प्रश्न का उत्तर दे पाएंगे। भूगोल के लिए सबसे अच्छा स्रोत एनसीईआरटी की किताबें हैं समझ के स्तर पर निर्भर करते हुए, कोई को 6 से 12 वीं कक्षा तक की एनसीईआरटी पुस्तकों पढ़ सकता है। अगर भूगोल को समझने में कठिनाई होती है, तो उसे 6 वीं कक्षा से पढ़ना चाहिए। लेकिन अगर किसी के लिए भूगोल सरल विषय है और पहले से ही भूगोल के बारे में अच्छा ज्ञान रखता है, तो वह सीधे 11 वीं और 12 वीं एनसीईआरटी पुस्तकों को पढ़ सकता है। इसके अलावा, नियमित नक्शा पढ़ना चाहिए। आपको स्कूल एटलस बुक लेना चाहिए और न्यूनतम 20 मिनट तक नक्शे देखने चाहिए।

नक्शे का अध्ययन करने के बाद, किताब को बंद कर और मन में उस स्थान की कल्पना करना चाहिए। अपने अध्ययन के अनुसार कोरे कागज पर नक्शा बनाने की कोशिश करें और उस पर निशान लगायें। अगर कोई इन क़दमों का ठीक से पालन करेगा, तो उसे परीक्षा के दौरान स्थान जल्दी याद आयेंगे। एनसीईआरटी पुस्तकों को पढ़ने के साथ-साथ भूगोल की तैयारी के लिए मॉक टेस्ट देना भी अनिवार्य है। इसके द्वीस्तरीय प्रभाव होंगे: पहला, आपने जो भी पढ़ा है, क्या आप उससे प्रश्न का उत्तर दे पा रहे हैं या नहीं? यदि नहीं तो इसका मतलब है कि अध्याय पूरी तरह से नहीं समझा गया है। दूसरा, आपको यह समझने में मदद करेगा कि परीक्षा में प्रश्नों को कैसे हल किया जाए। यदि आपको सटीक उत्तर नहीं ज्ञात तो एक या दो विकल्प हटा कर अनुमानित उत्तर लगाने की कोशिश करें|

भूगोल में विश्व भौतिक भूगोल,जलवायु-विज्ञान, पर्यावरण-विज्ञान,पारिस्थितिकी और आर्थिक भूगोल आदि टॉपिक का विस्तार से अध्ययन करना चाहिए । इन टॉपिक का अध्ययन प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों के दृष्टिकोण से लाभप्रद है। अभ्यर्थियों को समकालीन मुद्दों के साथ कृषि और औद्योगिक भूगोल पर ध्यान देना चाहिए। भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न टॉपिक भूगोल से अंतर्संबंध रखती हैं. उदाहरण के लिए, फसल प्रणाली, सिंचाई-प्रणाली, औद्योगिक संसाधन, गरीबी, अकाल आदि का भौगोलिक कारकों के साथ अंतर्संबंध है। आपदा और आपदा-प्रबंधन केवल नीतिगत और प्रशासनिक ढाँचे पर ही आधारित नहीं होते, बल्कि आपदाओं, जैसे कि चक्रवात, बाढ़, सुनामी, भूकंप आदि का विश्लेषण आवश्यक है। यह रणनीति प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों में छात्रों के लिए लाभदायक होगी।

इस विषय की दूसरी विशेषता है सही रणनीति की मदद से न्यूनतम समय में तैयारी, ताकि अच्छे अंक भी हासिल हों और कोई जोखिम भी न रहे। इस विषय के मात्र 60% भाग की तैयारी कर आप पूर्णतः सुरक्षित हो जाते हैं। इसके लिए जरूरी है कि आप पाठ्यक्रम के अंकदायी भागों का वैज्ञानिक विश्लेषण करें। इनका विश्लेषण पिछले वर्षों के प्रश्न-पत्रों पर गहन व सूक्ष्म दृष्टि रखकर किया जा सकता है। इस संदर्भ में मुख्य परीक्षाओं के प्रश्नों का वस्तुनिष्ठ विश्लेषण करने से यह निष्कर्ष निकलता है कि प्रथम प्रश्न-पत्र के खंड ‘क’ से दो दीर्घ व खंड ‘ख’ से एक दीर्घ प्रश्न का उत्तर देना अंक प्राप्ति की दृष्टि से अधिक उपयोगी है, क्योंकि पहला खंड पूर्णतः विश्लेषणात्मक है एवं गहरी समझ की मांग करता है। यदि इनका वैज्ञानिक ढंग से अध्ययन किया जाये तो इसमें 70% से भी अधिक अंक हासिल हो सकते हैं। यहां आप चयनात्मक हो सकते हैं, क्योंकि अब तक आये हुए प्रश्नों के अध्ययन से ज्ञात होता है कि भूगोल के पाठ्यक्रम के प्रश्न पत्र-1 के खंड ‘क’ के प्रथम तीन अध्याय भू-आकृति विज्ञान, जलवायु विज्ञान व समुद्र विज्ञान और खंड ‘ख’ के अध्याय मानव भूगोल में ‘मॉडल, सिद्धांत एवं नियम’ तथा ‘जनसंख्या व बस्ती भूगोल’ अध्याय का अध्ययन भी कर लिया जाना चाहिए। इन पांच अध्यायों से आपको दीर्घ प्रश्नों के अलावा लघु प्रश्न भी मिल जाते हैं। इसी प्रकार द्वितीय प्रश्न प्रश्न-पत्र के खंड ‘क’ के तीन अध्याय भौतिक विन्यास, कृषि व उद्योग को आप गहन अध्ययन व विश्लेषण के लिए चुन सकते हैं। वहीं दूसरी ओर खंड ‘ख’ के अध्याय ‘समकालीन समस्याएं’ और ‘‘बस्ती’’ अध्याय का अध्ययन कर लेना चाहिए।

प्रश्नों की रणनीति

दीर्घ प्रश्न: यद्यपि इसके लिए शब्द-सीमा निर्धारित नहीं है, परंतु आपसे 600-800 शब्दों की सीमा के अंदर एवं अपेक्षित मानचित्र, आरेख, रेखाचित्र आदि से सुसज्जित एवं गहन विश्लेषणपरक उत्तर की अपेक्षा की जाती है। अनावश्यक विस्तार विषय पर आपकी कमजोर पकड़ का परिचायक माना जाता है। साथ ही समय के बेहतर प्रबंधन हेतु भी संक्षिप्त प्रभावी उत्तर देने का प्रयास होना चाहिए। अतः कुछ चुने हुए प्रश्नों का लिखित अभ्यास कर लिया जाना आपकी सफलता को सुनिश्चित करेगा।

लघु प्रश्न: जहां दीर्घ प्रश्नों का 600-800 शब्दों में उत्तर अपेक्षित है, वहीं लघु प्रश्नों के लिए स्पष्ट रूप से 200 शब्दों की सीमा निर्धारित है। परीक्षक इस शब्द सीमा के 10% तक के अतिक्रमण को सामान्य मानकर चलते हैं, परंतु इससे अधिक का अतिक्रमण नकारात्मक माना जाता है एवं इसकी वहज से अपेक्षित अंकों में से कुछ अंकों की कटौती की जा सकती है। अतः शब्द सीमा के अंतर्गत रहकर ही प्रश्नों के उत्तर दिये जाने चाहिए। इससे आप न सिर्फ अपने उत्तर का सही मूल्यांकन प्राप्त कर सकते हैं, वरन दीर्घ प्रश्नों के लिए समय का बेहतर प्रबंधन भी कर सकते हैं। इसके लिए सभी संभावित लघु प्रश्नों का निर्धारित शब्द सीमा में प्रभावी उत्तर लिखने का अभ्यास आवश्यक है। वैसे भी विगत दो तीन सालों से जिस तरह इस प्रकार के प्रश्न पूछने की प्रवृत्ति बढ़ी है उसे ध्यान में रखते हुए इधर अधिक ध्यान देना चाहिए।

मानचित्र कार्य: वर्तमान में यह केवल एक ही प्रश्न पत्र में पूछा जाने लगा। इस के सभी सही हल दे सकने के लिए विषय का सतर्क व प्रयोगात्मक अध्ययन आवश्यक होता है। प्रश्नों की तैयारी के क्रम में अनेक सूक्ष्म तथ्य आते रहते हैं। इनमें से अनेक मानचित्र कार्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण होते हैं। अतः अध्ययन के क्रम में भौतिक, आर्थिक व मानवीय सभी पहलुओं के उन सभी तथ्यों को उनसे संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं का एक ‘सूचना बैंक’ बना लेनी चाहिए एवं उन तथ्यों को मानचित्र के आधार पर निरंतर अभ्यास किया जाना चाहिए। उदाहरण के लिए भूगोल प्रश्न-पत्र-1 के भौतिक भूगोल अध्ययन के क्रम के विभिन्न नदियों, पर्वतों, झीलों, अंतःसागरीय आकृतियों, जलसंधियों, खाड़ियों, समुद्री जलधाराओं, घासभूमियों, जलवायु प्रदेशों आदि से संबंधित सूचनाएं आती रहती हैं, जिनका मानचित्र पर अभ्यास अपेक्षित है एवं उनसे संबंधित महत्वपूर्ण बिन्दुओं को जानना भी आवश्यक है। इसी प्रकार द्वितीय प्रश्न-पत्र के आर्थिक पहलू के अध्ययन क्रम में महत्वपूर्ण खनन केंद्र, औद्योगिक केंद्र, बंदरगाह, राष्ट्रीय राजमार्ग, हवाई अड्डे आदि के बारे में कहा जा सकता है। मानचित्र कार्य में शुद्धता का काफी महत्व है।

भारत के भूगोल के लिए कैसे तैयारी करें?

इससे पहले की हम भारत के भूगोल के लिए एक विस्तृत रणनीति बनाने की ओर बढ़ें, सबसे पहले एक नज़र इसके पाठ्यक्रम पर डालते हैं| भारत के भूगोल (IAS Prelims) के लिए UPSC पाठ्यक्रम के अंतर्गत भारत का भौतिक, सामाजिक और आर्थिक भूगोल आता है|

एक स्पष्ट दृष्टिकोण के लिए, हम आपके लिए भारत के भूगोल के इन संबंधित उपखंडों को वर्गीकृत किए हैं:

भारतीय भूगोल: व्यापक स्तर पर वर्गीकरण

भारतीय भूगोल को व्यापक रूप से निम्नलिखित भागों में विभाजित किया जा सकता है:

प्राकृतिक भूगोल
भारत का नदी तंत्र
जलवायु
भारत की खनिज संपदा
मृदा और उसके प्रकार
खेती
जंगल
जीव-जगत और उनका संरक्षण
मानव भूगोल

सही दृष्टिकोण: भारत का भौतिक, सामजिक और आर्थिक भूगोल

1. विषय की गहराई तक जाने का प्रयास करें:

भारत के भौतिक भूगोल की तैयारी करते हुए एक बात का हमेशा ध्यान रखिए कि केवल तथ्यों का पीछा न करें| तथ्यों को केवल रट लेना काफी नहीं है और इसका कोई मतलब नहीं है| इससे पहले कि आप भौतिक भूगोल की ओर बढ़ें, Onlinetyari आपको सबसे पहले भौतिक भूगोल के बेसिक को स्पष्ट रूप से समझने की सलाह देता है| एक बार आप भौतिक भूगोल के बेसिक कॉन्सैप्ट से परिचित हो जाएं तो आप भारत के भौतिक भूगोल के अध्ययन के लिए तैयार हैं| यहां प्रत्येक खंड और उसके उपखंडों को विस्तार से समझें|

उदाहरण के तौर पर यदि आपको भारत का प्राकृतिक भूगोल समझना है, तो आप इस विषय से संबंधित विशेष स्त्रोतों से जानकारी लेना प्रारंभ करें| ऐसा करते हुए आप प्रत्येक भौगोलिक परिवेश को समझेंगे, इसी के साथ उनकी निर्माण प्रक्रिया को भी जानेंगे, उन परिवेशों की खनिज संपदा और वहां की जलवायु के मौजूदा हालत का कारण भी समझेंगे| वहां की वनस्पतियों के विषय में जानेंगे और इसके मानवीय गतिविधियों और जलवायु पर पड़े प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रभाव को समझेंगे|

इसी प्रकार ”भारत के नदी तंत्र” के अध्ययन के लिए इनके उद्भव, वर्गीकरण और जल निकासी प्रणाली (वे राज्य जिनसे होकर ये नदियां गुजरती हैं), नदी तंत्र की विशेषताएं, दो नदी तंत्रों के मध्य अंतर तथा प्रत्येक नदी तंत्र की विशिष्टताओं पर विशेष ध्यान देने की ज़रूरत है| भारत के नदी तंत्रों के बारे में अत्यधिक रोचक तथ्य हैं| उदाहरण के तौर पर, पूर्व की ओर बहने वाली नदियां डेल्टा का निर्माण करती हैं, कुछ नदियां पश्चिम की ओर बहती हैं जबकि अधिकतर नदियां पूर्व की ओर ही बहती हैं| इससे संबंधित बहुत सी जानकारी NCERT की पुस्तकों में उपलब्ध है, जिन्हें भली भांति समझना और याद करना आवश्यक है| सिविल सेवा Preliminary परीक्षा में इन विषयों से पहले भी सीधे प्रश्न पूछे गए हैं और आगे भी ऐसा होने की संभावना है|

जलवायु एक रोचक हिस्सा होने के साथ ही महत्वपूर्ण भी है| भारतीय मॉनसून को समझने के लिए NCERT से बेहतर पुस्तक कोई नहीं है| जब आप भारत की जलवायु का अध्ययन करें तो ध्यान रहे कि भारत की जलवायु को तय करने वाले कारकों जैसे ऊपरी हवा सर्कुलेशन, मग़रिबी हवा (westerlies), जेट धाराएं और चक्रवात (उष्णकटिबंधीय और शीतोष्ण), एल-नीनो, ला-नीनो को अवश्य जान और समझ लें|

खनिजों की स्थिति, उनकी गुणवत्ता, प्रयोग, नुकसान और इन सभी के पीछे मौजूद कारणों को भी जानना महत्वपूर्ण है, तभी आप भारत की खनिज संपदा को ठीक तरह से समझ पाएंगे|

2. सही पुस्तकों और स्रोतों की मदद लें:

कक्षा 6 से 12 तक की भूगोल की NCERT की पुस्तकें|

Oxford student Atlas या Orient Blackswan Atlas | अपना आधार मजबूत करने के लिए NCERT की कक्षा 6-10 की पुस्तकों की सहायता लें| जबकि कक्षा 11 और 12 की चार पुस्तकें आपको भूगोल के एक अधिक व्यापक रूप से परिचित कराएंगी|

पढ़ते समय महत्वपूर्ण बिन्दुओं को अवश्य हाइलाइट कर लें तथा साथ ही नोट्स भी बनाते रहें|

3. स्कूल के एटलस का प्रयोग करें:

इस बात से तो हम सभी सहमत हैं कि भूगोल कई बार बहुत बोरिंग भी हो सकता है| तो ऐसे में, क्यों न हम नक्शों की मदद लें? किसी भी चीज़ का चित्रात्मक प्रेसेंटशन हमेशा ही आपको बेहतर समझ आता है और ज़्यादा देर तक याद भी रहता है| भूगोल की तैयारी करते हुए हमेशा अपने साथ एक एटलस रखें|

4. अपनी तैयारी को परखें और अपनी गलतियों से सीखें:

हमें कभी भी IAS परीक्षा की तैयारी को हल्के में लेने की भूल नहीं करनी चाहिए| शुरुआत करने के लिए, आप पिछले वर्षों में आए प्रश्नपत्रों को हल करने से प्रारंभ कर सकते हैं| बाज़ार में उपलब्ध विभिन्न प्रश्न बैंकों की मदद भी ली जा सकती है| कोशिश करें कि आप हर सप्ताह अपना टेस्ट लें, जिससे कि आप अपनी तैयारी में सुधार देख पाएं| एक अच्छी टेस्ट सीरीज़ आपको स्वयं को जांचने में बेहतर सहयोग करेगी और आप बेहतर सुधार कर पाएंगे|

विश्व के भूगोल के लिए कैसे तैयारी करें?

भौतिक भूगोल से जुड़े हुए कई घटनाक्रम और अनेकों कॉन्सैप्ट वैश्विक भूगोल का हिस्सा हैं| यहां इस बात को साफ कर देना अत्यंत आवश्यक है कि विश्व के भूगोल की आपकी समझ आपके लिए भारतीय भौतिक भूगोल और वातावरण जैसे कुछ विषयों को काफी आसान बना देगी|

विश्व का भूगोल: व्यापक स्तर पर वर्गीकरण:

वैश्विक भूगोल को व्यापक स्तर पर निम्नलिखित भागों में विभाजित किया जा सकता है:

पृथ्वी और ब्रह्माण्ड
भू-आकृतियां और उनका निर्माण
वातावरण
पवन प्रणाली
बादल और प्रेसीपिटेशन
हाइड्रोस्फेयर
विश्व की विभिन्न प्रकार की जलवायु और जलवायु परिवेश

1. प्रत्येक विषय को छोटे–छोटे उप-विषयों में विभाजित कर लें

कोई एक विषय चुन लें और फिर इसे उप-विषयों में वर्गीकृत कर लें| नीचे दी गई सूची आपको इस विषय में बेहतर समझा पाएगी कि किसी एक विषय में क्या-क्या सम्मिलित होता है|

उदाहरण के तौर पर, हम “पृथ्वी और ब्रह्माण्ड” जैसे किसी विषय को इस तरह से वर्गीकृत करते हैं:

सौरमंडल
पृथ्वी की गति- घूर्णन और परिक्रमण- दिन और रात
पृथ्वी के अक्ष का झुकाव- मौसम पर इसका प्रभाव
अक्षांश और देशांतर
महत्वपूर्ण समानांतर और मध्याह्न
सूर्यग्रहण, चंद्र ग्रहण तथा ज्वार और उनके महत्व
पृथ्वी की सतह
पृथ्वी की संरचना
चट्टानों का वर्गीकरण: आग्नेय, अवसादी, रूपांतरित

2. महत्वपूर्ण बिन्दुओं की पहचान करें और रुझान में प्राथमिकता लाएं:

अब आप जैसे-जैसे कोई पुस्तक पढ़ते हैं, ये सुनिश्चित करें कि आप उन सभी उप-विषयों को जानते हैं जिन पर आपको अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है| ये महत्वपूर्ण बिन्दु आवश्यक हैं क्योंकि अक्सर ही वहां से सीधा या कई बार टेढ़ा प्रश्न पूछ लिया जाता है, या ये वो बिन्दु होते हैं जिन्हें समझना, आपको आगे के विषयों को समझने में सहायक सिद्ध होता है| तैयारी के दौरान इन बिन्दुओं पर विशेष ध्यान दें। आगे बढ़ने से पहले हमेशा ये सुनिश्चित कर लें कि आप पिछला बिन्दु पूरी तरह से समझ चुके हैं|

हम अपने किसी अगले लेख में आपके लिए महत्वपूर्ण बिन्दुओं की एक सूची पेश करेंगे|

3. सही स्रोतों और पुस्तकों की सहायता लें

Goh Cheng Leong द्वारा लिखी गई पुस्तक ‘Certificate Physical & Human Geography’ प्रत्येक IAS उम्मीदवार के पास होनी चाहिए| यह पुस्तक विषयों को संक्षिप्त में और टू द पॉइंट समझाती है| इसमें भूगोल के पाठ्यक्रम के सभी हिस्से मौजूद हैं और अगर आप इसके बाद भी कहीं फंस जाते हैं तो इंटरनेट की मदद ली जा सकती है|

4. स्कूल के एटलस का प्रयोग करें

इस बात से तो हम सभी सहमत है की भूगोल कई बार बहुत बोरिंग भी हो सकता है| तो ऐसे में, क्यों न हम नक्शों की मदद लें? किसी भी चीज़ का चित्रात्मक प्रेजेंटेशन हमेशा ही आपको बेहतर समझ आता है और ज़्यादा देर तक याद भी रहता है| भूगोल की तैयारी करते हुए हमेशा अपने साथ एक एटलस रखें|

5. अध्ययन के दौरान अपने स्वयं के नोट्स तैयार करें

महत्वपूर्ण बिन्दुओं को चिन्हित मात्र कर लेना पर्याप्त नहीं है| पढ़ाई के दौरान जैसे-जैसे आप विभिन्न विषयों का अध्ययन करते हैं, अपने स्वयं के नोट्स तैयार करते जाएं| भविष्य में जब आप दोहराएंगे, तब आपके लिए सहायक सिद्ध होगा|

6. अपनी तैयारी के स्तर को परखें और अपनी गलतियों से सीखें

हम जानबूझ कर हर बार वही बात दोहरा रहे हैं, जैसा कि हमने पहले भी कहा था| एक अच्छी टेस्ट सीरीज़ आपको अपनी तैयारी को बेहतर प्लान करने में मददगार साबित होगी तथाअसल परीक्षा में छोटी-छोटी- गलतियों को कम से कम करने में सहायक सिद्ध होगी, स्वयं को परखने में आपकी सहायता करेगी और आपको सुधार बिन्दुओं की ओर ले जाएगी, जहां से आप और बेहतर कर पाएंगे|

सामान्य अध्ययन, निबंध व साक्षात्कार हेतु भूगोल विषय की भूमिका

वस्तुतः किसी भी देश की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक परिस्थितियां ही नहीं, वरन् उसका ऐतिहासिक विकास भी उसके भौगोलिक परिदृश्य से निर्धारित होता है। अतः भूगोल विषय का अध्ययन आपके दृष्टिकोण को व्यापक बनाता है, जिससे आप विभिन्न घटनाक्रमों को प्रेरित करने वाले कारकों को समझ सकने की वैज्ञानिक दृष्टि पाते हैं। यह दृष्टि आपको न सिर्फ सामान्य अध्ययन, वरन् निबंध लेखन व साक्षात्कार में भी अच्छे अंक लाने में सहयोग प्रदान करता है। आजकल तो निबंध में भी सीधे भूगोल से जुड़े एक टॉपिक के आने की प्रवृत्ति देखने में आ रही है।

भूगोल के अध्ययन से प्रारंभिक परीक्षा में जहां आप स्वयं सामान्य अध्ययन के लगभग 30 प्रश्नों को कर सकने में सहज रूप से सक्षम पाते हैं, वहीं मुख्य परीक्षा में भी आप स्वयं को हर तरह से बेहतर स्थिति में पाते हैं। सामान्य अध्ययन के खंड ‘भारत का भूगोल’ के प्रश्नों के अलावा भी भूगोल विषय से संबंधित प्रश्न प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सिविल सेवा की मुख्य परीक्षा में आते रहे हैं। उदाहरण के लिए ‘समसामयिक राष्ट्रीय प्रश्न और सामाजिक प्रासंगिकता के विषय’ के अनेक प्रश्न भूगोल से सीधे संबंध रखते हैं। ये हैं जनसांख्यिकी एवं मानव संसाधन तथा संबंधित समस्याएं, पर्यावरण संबंधी प्रश्न, पारिस्थितिकी रक्षण, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण।

मुख्य परीक्षा हेतु भूगोल विषय के प्रश्न-पत्रों का संभावित प्रारूप

किसी भी विषय में केवल संभावित प्रश्नों का चयन कर सिर्फ उसे ही तैयार करना कभी भी खतरे से खाली नहीं माना जाता। अतः यहां सुझाव है कि महत्वपूर्ण प्रश्नों का नहीं, वरन उन अध्यायों का चयन किया जाये जो अधिक अंकदायी हों एवं जिन्हें तैयार कर लेने पर किसी भी प्रश्न के छूटने का कोई जोखिम नहीं रहे। इसके लिए उपयुक्त अध्यायों का अध्ययन अपेक्षित है, जैसा कि पहले की चर्चा की जा चुकी है। इससे आप न सिर्फ अच्छे अंक हासिल कर सकेंगे, वरन बिल्कुल कम समय में पाठ्यक्रम के लगभग 60ः भाग की तैयारी करके पूर्णतः सुरक्षित हो सकेंगे। इस प्रकार चुने हुए अध्यायों अध्ययन की सलाह करना चाहिए, न कि चुने हुए प्रश्नों का।

भूगोल में अच्छे अंक कैसे लाएं

वैसे तो सिविल सेवा परीक्षा के लिए अपने दोष को छिपा पाना एक मुश्किल कार्य है, फिर भी भूगोल विद्यार्थियों को यह इजाजत देता है कि वे अपनी कुछ गलतियों को छिपा सकें। भूगोल का स्वरूप विविध एवं बहुआयामी है। यह विभिन्न खंडों एवं विषयों से बना है, जो अलग-अलग और विविध विषयों से लिए गये हैं। अलग-अलग विषयों के अपने लाभ, हानि और विशेषताएं हैं। भूआकृति विज्ञान में भाषा संबंधी दक्षता को उजागर किया जा सकता है जहां भाषा, विश्लेषणात्मक क्षमता, आरेख निर्माण इत्यादि गुण नहीं हैं, तो उन्हें छिपाया जा सकता है जैसे आर्थिक भूगोल एवं मॉडल सिद्धांत। साथ ही साथ कुछ ऐसे खंडों के ऊपर विशेषीकरण किया जा सकता है, जो सामान्य अध्ययन में भी मदद कर सकें। प्रथम और द्वितीय दोनों प्रश्नों में ऐसी रणनीति के सहारे सामान्य अध्ययन की तैयारी भी इस हद तक हो सकती है कि विज्ञान प्रौद्योगिकी, समाजिक मुद्दे और अर्थशास्त्र में 100 से भी अधिक अंकों के प्रश्नों का उत्तर दिया जा सकता है।

अंततः भूगोल में एक बात का ध्यान देना अधिक आवश्यक है। इस बात को सामान्य विद्यार्थी नहीं समझ पाते। भूगोल और दूसरे किसी भी वैकल्पिक विषय के संदर्भ में हमेशा भूगोल से ही प्रांरभिक परीक्षा की तैयारी करनी चाहिए। इसके बहुत से कारण है, जिनमें निम्न मुख्य हैं:

Ø संकल्पनात्मक होने के कारण प्रारंभिक परीक्षा की तैयारी का लाभ मुख्य परीक्षा में अधिक मिलेगा और ऐसा लाभ अन्य विषयों में नहीं मिला।

Ø भूगोल प्रारंभिक परीक्षा की दृष्टि से इतिहास के बाद दूसरा सबसे सुरक्षित विषय है।

ध्यातव्य है कि सही रणनीति ही बेहतर सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है। इसके लिए जरूरी है समुचित व श्रेष्ठ मार्गदर्शन की।

विषय की तैयारी

पाठ्य सामग्री की उपलब्धता

1. पाठ्य सामग्री, पुस्तक एवं लेख की उपलब्धता आवश्यक है। इसके लिए मार्गदर्शक से पर्याप्त मदद ले सकते हैं।
2. विभिन्न प्रकार के रिपोर्ट का समावेश उत्तर लिखने के क्रम में करने पर उत्तर की विश्वसनीयता बढ़ती है।
3. समाचार पत्रों के उद्धरण तथा तथ्यों ;ब्सपचचपदहेद्ध का यथोचित उपयोग आवश्यक है।
उच्च कोटि के विश्वसनीय नोट्स (उत्तर) की तैयारी
1. प्रत्येक प्रयन की एक आदर्श रूपरेखा होती है, जिसे प्रश्न को देखकर तुरंत निश्चित करना होता है।
2. प्रश्न से संबंधित उन मुद्दों का समावेश होना चाहिए जो राष्ट्रीय अथवा अंतर्राष्ट्रीय रूप से समाचार में रहे हो |
3. उत्तर लिखने के दौरान आंकड़ों एवं तथ्यों का डायग्राम एवं मानचित्र के रूप में प्रदर्शन उत्तर को प्रभावी बनाता है।
4. उत्तर भाषात्मक तथा अवधारणात्मक दोषों से मुक्त हो।

परीक्षा हॉल में प्रश्नोत्तरों की प्रस्तुति

1. परीक्षा के दौरान प्रथम दो प्रश्नों का उत्तर लिखें जिसमें पर्याप्त ग्राफ, डायग्राम, मानचित्र आदि हो तथा जिसके लिखने का पूरा अभ्यास हो।
2. तीसरे प्रश्न के रूप में एक छोटा उत्तर देना आवश्यक है। इसलिए ऐसे प्रश्न का उत्तर लिखें जो अवधारणात्मक हो तथा जिसमें ग्राफ, मानचित्र आदि हों।
3. चौथे प्रश्न के रूप में मानचित्र तथा पांचवें प्रश्न के रूप में लघुनिबंधात्मक प्रश्नों का उत्तर देना उचित है।
4. भाषा तथा विचार में स्पष्टता हो।
5. लिखावट का पर्याप्त अभ्यास हो ताकि उत्तर पत्र प्रभावी दिखे।

अनुशंसित पुस्तकें

Ø भौतिक भूगोल: सविन्द्र सिंह
Ø पर्यावरण भूगोल: सविन्द्र सिंह, हिंदू का पर्यावरण सर्वेक्षण रिपोर्ट
Ø भौगोलिक विचारधरा: माजिद हुसैन
Ø मानव भूगोल: माजिद हुसैन
Ø जनसंख्या भूगोल: वी.पी. पांडा
Ø बस्ती भूगोल व नगरीय भूगोल: बंसल
Ø आर्थिक भूगोल: काशीनाथ सिंह एवं जगदीश सिंह
Ø राजनीतिक भूगोल: दीक्षित
Ø एनसीईआरटी की 6वीं से 12वीं तक की फस्तकें

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