भारत-पुर्तगाल के बीच 11 अहम समझौतों पर हस्ताक्षर, जरूर जानें- इस दौरे की क्या है अहमियत…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पुर्तगाल यात्रा के दौरान नई दिल्ली और लिस्बन ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में शोध को बढ़ावा देने के लिए 40 लाख यूरो (लगभग 28 करोड़ रुपए) के संयुक्त कोष की घोषणा की हुई। मोदी ने आतंकवाद से मुकाबले, अंतरिक्ष एवं जलवायु अध्ययन जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर अपने पुर्तगाली समकक्ष एंटोनियो कोस्टा से बातचीत की। 11 द्विपक्षीय समझाौतों पर दस्तखत के बाद एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में मोदी और कोस्टा ने कहा कि दोनों देशों के बीच रिश्तों में पिछले छह महीने में काफी प्रगति हुई है। गौरतलब है कि कोस्टा गोवा से ताल्लुक रखते हैं। दोनों नेताओं ने कहा कि जनवरी में कोस्टा की भारत यात्रा के बाद से दोनों देशों ने अच्छी खासी प्रगति की है। पीएम मोदी ने कहा कि 70 साल में पहली बार कोई भारतीय प्रधानमंत्री यहां द्विपक्षीय बातचीत के लिए आया है। इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी यहां आए थे, लेकिन वह यूरोपीय यूनियन की बैठक में हिस्सा लेने आए थे। वहीं, एंटोनियो कोस्टा भारतीय मूल के हैं और उनके कई रिलेटिव्स गोवा के मडगांव में रहते हैं। एंटोनियो कोस्टा के पिता ओर्लांदो द कोस्टा मशहूर नॉवेलिस्ट थे। उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर पर भी एक लेख लिखा था। गोवा में जब पुर्तगालियों का शासन था, उस वक्त ओर्लांदा युवा थे और उन्होंने कई साल इसी शहर में गुजारे थे। पुर्तगाल में भारतीय मूल के करीब 70 हजार लोग रहते हैं। बैंकिंग से लेकर तमाम क्षेत्रों में भारतीय मूल के कारोबारियों का दबदबा है। पीएम मोदी ने कहा कि पुर्तगाल का भारत के साथ ऐतिहासिक संबंध है, लेकिन गुजरात के साथ उसका संबंध विशेष है। उन्होंने कच्छ के नाविक कांजी मालम की कहानी सुनाई, जिसने 1497 में पुर्तगाली नाविक वास्को डि गामा को यूरोप से भारत तक के समुद्री मार्ग का पता लगाने में मदद की थी।

इसके अलावा, बाहरी अंतरिक्ष, दोहरे कराधान से बचाव, नैनो प्रौद्योगिकी, सांस्कृतिक संबंधों में सुधार, युवा एवं खेल, उच्च शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान, पुर्तगाल-भारत व्यापार केंद्र एवं इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स में सहयोग जैसे क्षेत्रों में समझाौते हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिस्बन में भारत-पुर्तगाल अंतरराष्ट्रीय स्टार्टअप हब की भी शुरुआत की। इंडिया-पुर्तगाल इंटरनैशनल स्टार्ट-अप हब ऐसा प्लैटफॉर्म है जिसे दोनों देशों के स्टार्ट-अप संबंधी समूचे ढांचे को मजबूत बनाने के लिए विकसित किया गया है। पीएम मोदी ने कहा कि स्टार्ट-अप सहयोग के लिए एक दिलचस्प क्षेत्र है। यह समाज के लिए मूल्य और संपत्ति पैदा करने का बड़ा माध्यम है।’ उन्होंने कहा कि पुर्तगाल स्टार्ट अप का क्रिएटिव हब बन सकता है। इसस पहले पिछले दिनों यहां एक स्टार्ट अप के एक कार्यक्रम में 700 युवा हिस्सा लेने आए थे

पुर्तगाल की द्विपक्षीय यात्रा करने वाले प्रथम भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पुर्तगाल की अर्थव्यवस्था में फिर से आयी तेजी और भारत की ठोस वृद्धि ने दोनों देशों को साथ बढ़ने का सुनहरा मौका दिया है। मोदी ने कहा कि आतंकवाद और हिंसक चरमपंथ के खिलाफ सहयोग को गहरा बनाने को लेकर दोनों देश प्रतिबद्ध हैं। प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्थाओं में स्थाई सदस्यता पाने के लिए भारत की ओर से की जा रही कोशिशों में लगातार समर्थन किए जाने को लेकर पुर्तगाल का शुक्रिया भी अदा किया। अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग के बाबत मोदी ने 40 लाख यूरो के एक संयुक्त विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी कोष की स्थापना की घोषणा की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के आर्थिक संबंध उन्नति की ओर हैं और वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी एवं मानव संसाधनों के सुगम प्रवाह के लिए हम और प्रयास कर सकते हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस के साथ अस्ताना में हुई अपनी हालिया बैठक के बारे में भी बात की। दरअसल, गुटेरस पुर्तगाल के पूर्व प्रधानमंत्री हैं।

मोदी ने कहा कि वह अटलांटिक अंतर्राष्ट्रीय शोध केंद्र में अंतरिक्ष और समुद्री विज्ञान क्षेत्र में पुर्तगाल के साथ काम करने की आशा करते हैं। उन्होंने कहा कि इन समझाौतों से इस शोध केंद्र पर एक अनोखे केंद्र की स्थापना की ओर पुर्तगाल के साथ भारत के संबंधों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह शोध केंद्र ट्रांस अटलांटिक और उत्तर-दक्षिण सहयोग के लिए एक नवोन्मेष केंद्र के रूप में काम करेगा। इस केंद्र का लक्ष्य नई जलवायु, पृथ्वी, अंतरिक्ष और समुद्री शोध का एक साझाा लक्ष्य मुहैया करना है। अंतरिक्ष के संबंध में अगली पीढ़ी के नैनो और छोटे उपग्रहों का विकास और सहयोग शामिल होने की उम्मीद है। समुद्री विज्ञान पर परियोजना भारत को अटलांटिक के वायुमंडलीय और समुद्री व्यवहार और मॉनसून सहित मौसमी पद्धति से इसके संबंध का अध्ययन करने में सक्षम बनाएगा।

मोदी ने यह भी घोषणा की कि भारत लिस्बन विविद्यालय में चेयर फॉर इंडियन स्टडीज स्थापित करेगा और एक हिन्दी-पुर्तगीज शब्दकोश का विकास करेगा।
उन्होंने कहा कि गोवा और पुर्तगाल के बीच 17 वीं सदी में हुए पत्रों के आदान प्रदान से जुड़े 12000 दस्तावेजों के डिजीटल प्रारूप साझाा करने को लेकर वह पुर्तगाल का शुक्रिया अदा करते हैं। मोदी ने कहा कि ये पत्र भारत में अनुसंधानकर्ताओं की मदद करेंगे। गोवा पर पुर्तगाल ने तब विजय हासिल की थी, जब पुर्तगाली भारत के गवर्नर एफोंसो डि अल्बुकर्क ने 1510 ईस्वी में इस शहर पर कब्जा कर लिया था। पुर्तगाल के साथ कूटनीति विफल होने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने भारतीय बलों को गोवा पर बलपूर्वक नियंत्रण हासिल कर लेने का आदेश दिया था। 18 और 19 दिसम्बर 1961 को भारतीय सैनिकों ने बहुत कम प्रतिरोध के साथ गोवा पर नियंत्रण हासिल कर लिया था। वहीं, कोस्टा ने कहा कि भारत और पुर्तगाल डिजीटल साझोदारी के क्षेत्र में बहुत अच्छा काम करेंगे।

मोदी ने कहा कि पुर्तगाली प्रधानमंत्री कोस्टा दुनिया भर में प्रवासी भारतीय का सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधित्व करते हैं। पुर्तगाल में भारतीय मूल के काफी सारे लोग हैं। गौरतलब है कि पुर्तगाल में भारतीय समुदाय की आबादी करीब 65,000 है। मोदी ने कहा कि कोस्टा के भारतीय संबंध के अलावा फुटबॉल दोनों देशाें के लाेगाें काे एकदूसरे से और जाेड़ सकता है। उन्हाेंने कहा कि पुर्तगाल के लाेगाें में फुटबॉल काे लेकर काफी उत्साह है, प्रधानमंत्री काेस्टा स्वयं भी इसके बहुत बड़े प्रशंसक हैं। यह खेल हमारे समाजाें काे आपस में जाेड़ने में एक भूमिका निभा सकता है। काेस्टा ने कहा कि उनकी भारत यात्रा के बाद से पिछले छह महीनाें में काफी सारा काम हुआ है। अर्थव्यवस्था, विग्यान एवं प्रौद्याेगिकी के क्षेत्र में साझाेदारी में उपलब्धियां हासिल की गई हैं।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि पुर्तगाल यूरो जोन के PIGS (पुर्तगाल, आयरलैंड, ग्रीस और स्पेन) देशों में शामिल है। यह यूरो जोन का इकोनोमिक डिफॉल्टर रहा है। यूरोपीय सेंट्रल बैंकिंग की फंडिंग के बाद यह दिवालिया होने से बचा। ऐसे में, भारत को इससे इन्वेस्टमेंट की उम्मीद तो हो ही नहीं सकती। यह एक औपचारिक यात्रा है। भारत इस वक्त विदेश नीति के तहत हाशिए पर पड़े कुछ देशों, जैसे नॉर्वे सेशल्स, मंगोलिया, सेनेगल और अब पुर्तगाल को साथ ले रहा है। इन सभी की समुद्री सीमाएं हैं। ऐसे में यह स्ट्रैटेजिकली भारत के लिए मददगार हो सकते हैं। ब्रेक्जिट के बाद यूरोपीय यूनियन एक नया आकार लेगा। ऐसे में, पुर्तगाल भारत के लिए एक नया बाजार साबित हो सकता है।

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