पिछले दो सालों में देश का वनक्षेत्र 8021 वर्ग किमी बढ़ गया है। भारत में वनों की स्थिति को लेकर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मामलों के मंत्रालय की आज जारी रिपोर्ट के अनुसार देश के वन एवं वृक्षावरण के दायरे में 1.14 प्रतिशत बढ़ोतरी हुयी है। वन एवं पर्यावरण मंत्री डा. हर्षवर्धन ने वनक्षेत्र में बढ़ोतरी को केन्द्र सरकार की पर्यावरण हितैषी विकास नीति का परिणाम बताया। रिपोर्ट के अनुसार साल 2015 की तुलना में भारत का वन एवं वृक्षावरण क्षेत्र बढ़कर लगभग 8 लाख वर्ग किमी हो गया है। यह देश के कुल क्षेत्रफल का 24.39 प्रतिशत है। इसके मुताबिक देश में कुल वनक्षेत्र 708273 वर्ग किमी और वृक्षावरण क्षेत्र 93815 वर्ग किमी है। रिपोर्ट जारी करते हुये डा. हर्षवर्धन ने कहा कि भारत ने पर्यावरण संरक्षण संबंधी पेरिस समझौते के तहत देश का वनक्षेत्र 33 प्रतिशत तक ले जाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि पिछले चार सालों में पर्यावरण संरक्षण और विकास कार्यों के बीच संतुलन कायम करने की नीति को प्रभावी तौर पर लागू करने के कारण रिपोर्ट के उत्साहवर्द्धक परिणामों के आधार पर भारत अपने 33 प्रतिशत वनक्षेत्र के लक्ष्य में इजाफा करने की स्थिति में आ गया है। उन्होंने कहा कि भारत में विश्व की 17 प्रतिशत आबादी और 18 प्रतिशत पशुधन की उपलब्धता के बावजूद देश के 24.4 प्रतिशत क्षेत्रफल पर वनक्षेत्र की मौजूदगी महत्वपूर्ण उपलब्धि है। डा. हर्षवर्धन ने कहा कि सर्वाधिक वनक्षेत्र वाले शीर्ष नौ देशों का जनसंख्या घनत्व लगभग 150 है जबकि 382 जनसंख्या घनत्व के साथ भारत का दसवें पायदान पर रहना, बड़ी उपलब्धि है। कुल वन एवं वृक्षावरण क्षेत्र 802088 वर्ग किमी के साथ भारत विश्व में दसवें स्थान पर आ गया है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो सालों में आंध्र प्रदेश के वनक्षेत्र में सर्वाधिक 2141 वर्ग किमी का इजाफा हुआ है। इसके बाद कर्नाटक (1101 वर्ग किमी) , केरल (1043 वर्ग किमी) , ओडिशा (885 वर्ग किमी) और तेलंगाना (565 वर्ग किमी) वन क्षेत्र बढ़ाने वाले पांच शीर्ष राज्य हैं। हालांकि सर्वाधिक वनाच्छादित पूर्वोत्तर राज्यों के वनक्षेत्र में कमी आयी है। वन एवं वनावरण क्षेत्र में कमी आने वाले पांच राज्यों में मिजोरम (531 वर्ग किमी), नगालैंड (450 वर्ग किमी), अरुणाचल प्रदेश (190 वर्ग किमी), त्रिपुरा (164 वर्ग किमी) और मेघालय (116 वर्ग किमी) शामिल हैं। इसकी वजह के बारे में डा. हर्षवर्धन ने बताया कि इन राज्यों में हालांकि वनक्षेत्र पहले से ही 70 प्रतिशत से ज्यादा है लेकिन पूर्वोत्तर राज्यों में झूम खेती के प्रचलन में बढ़ोतरी, विकासकार्य, चक्रीय कटान, वनभूमि की श्रेणी में बदलाव, वनावरण क्षेत्र की जलमग्नता, प्राकृतिक आपदायें और कृषि क्षेत्र में विस्तार प्रमुख कारण हैं। भारत वनस्थिति रिपोर्ट 2017 का दायरा इस साल 589 जिलों से बढ़ाकर 633 जिलों तक किया गया है। रिपोर्ट में पहली बार वनक्षेत्रों में जलाशयों की स्थिति और राज्यों के स्तर पर वनों में कार्बन भंडार के आंकलन को भी शामिल किया गया। रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक दशक में भारत के वनक्षेत्रों में जलाशयों के क्षेत्रफल में 2647 वर्ग किमी का इजाफा हुआ है। इस मामले में महाराष्ट्र 432 वर्ग किमी वृद्धि के साथ अव्वल रहा है जबकि गुजरात (428 वर्ग किमी) और मध्य प्रदेश (389 वर्ग किमी) दूसरे एवं तीसरे स्थान पर हैं। इसी प्रकार समुद्र तटीय वनक्षेत्र (मेंग्रोव) के क्षेत्र में 181 वर्ग किमी की बढ़ोतरी हुयी है। मेंग्रोव क्षेत्र के विस्तार में महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और गुजरात शीर्ष राज्य रहे। देश के कुल वनक्षेत्र में 1.56 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्रफल बांस आच्छादित रहा। इस मामले में साल 2011 की तुलना में 17.3 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुयी है। इस कारण उत्पादित बांस के भंडारण में 1.9 करोड़ टन की वृद्धि दर्ज की गयी।

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