104 सैटेलाइट भेजने की विशेषज्ञता रखने वाले ‘रॉकेट मैन’ के. सिवन बने इसरो के नए प्रमुख, जानें खास बातें

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तिरुवनंतपुरम (केरल) स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के निदेशक और 104 सैटेलाइट भेजने की विशेषज्ञता रखने वाले डॉ. के. सिवन को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का नया चेयरमैन नियुक्त किया गया है। 1982 में इसरो से जुड़े सिवन वर्तमान चेयरमैन ए.एस. किरण कुमार की जगह लेंगे और उनका कार्यकाल 3 वर्षों का होगा। किरण कुमार की नियुक्ति 12 जनवरी 2015 को हुई थी।

104 सैटेलाइट भेजने की विशेषज्ञता रखने वाले सिवन की बदौलत ही पिछले साल फरवरी में भारत ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था। सैटेलाइट को कक्षा में भेजने के लिए जितने लोग तकनीक पर काम कर रहे थे, उनमें के सिवन वह प्रमुख व्यक्ति थे। के. सिवन ने कहा है कि वह इस नियुक्ति से काफी खुश हैं क्योंकि पिछले कुछ सालों में इसरो के चेयरमैन ने काफी महान कार्य किए हैं और वह उम्मीद करते हैं कि वह देश की सेवा करेंगे और इसरो को एक नई उंचाईयों तक लेकर जाएंगे।

सिवन ने बताया, “इस खबर को सुनने के बाद भी शरीर में कंपन हो रही है। मैं एक बात जानता हूं, इस पद पर विक्रम साराभाई, सतीश धवन,माधवन नायर जैसे महान लोग रहे। इसलिए यह बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। 12 जनवरी की लांचिंग सहित कई मिशन कतार में है। इसलिए जश्न का नहीं जिम्मेदारी का वक्त है।”

सिवन ने वर्ष 1980 में मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में स्नातक किया और वर्ष 1982 में बेंगलुरु के आईआईएससी से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर किया है। आईआईटी बॉम्बे से उन्होंने वर्ष 2006 में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में पीएचडी पूरी की। सिवन वर्ष 1982 में इसरो में आए और पीएसएलवी परियोजना पर उन्होंने काम किया। उन्होंने एंड टू ऐंड मिशन प्लानिंग, मिशन डिजाइन, मिशन इंटीग्रेशन ऐंड ऐनालिसिस में काफी योगदान दिया। वह इंडियन नेशनल ऐकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग, एयरोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया और सिस्टम्स सोसाइटी ऑफ इंडिया में फैलो हैं और कई जर्नल में उनके पेपर प्रकाशित हुए हैं। उन्हें कई पुरस्कारों से भी नवाजा गया है जिनमें चेन्नई की सत्यभामा यूनिवर्सिटी से अप्रैल 2014 में मिला डॉक्टर ऑफ साइंस और वर्ष 1999 में मिला श्री हरी ओम आश्रम प्रेरित डॉ विक्रम साराभाई रिसर्च अवॉर्ड शामिल है।

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