संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने हाल ही में सिविल सर्विस परीक्षा 2017 का अंतिम परिणाम घोषित कर दिया है जिसमें डुरीशेट्टी अनुदीप ने प्रथम स्थान हासिल किया है। वहीं, अनु कुमारी को इस परीक्षा में दूसरा और सचिन गुप्ता को तीसरा स्थान हासिल हुआ है। इस परीक्षा में 180 आईएएस, 42 आईएफएस (विदेश सेवा) और 150 आईपीएस अधिकारियों का चयन हुआ लेकिन इनमें से कुछ छात्र ऐसे भी हैं जिन्होंने ‘जिंदगी में कुछ भी हो सकता है, अगर करने की चाहत और जूनून हो’ के वाक्य को सही साबित किया। आइए हम उन्हीं में से एक छात्र विजय सिंह गुर्जर के बारे में बताते हैं…

झुनझुनू (राजस्थान) के रहने वाले विजय ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा राजस्थान में ही पूरी की थी। 2002 में द्वितीय श्रेणी से 10वीं और 2004 में प्रथम श्रेमी से 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद विजय ने 2009 में संस्कृत विषय से ग्रेजुएशन किया। इसके बाद 2010 में विजय का दिल्ली पुलिस में कॉन्स्टेबल के पद पर हुआ। हालांकि, इसके बाद विजय ने यह साबित किया कि भाग्य उसी का साथ देता है जो कर्म करता है। कड़ी मेहनत और लगन का परिणाम यह रहा कि 2010 में ही विजय का चयन दिल्ली पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के पद हो गया। विजय ने बताया कि वह अपनी नौकरी के साथ-साथ हर दिन नियमित रूप से पढ़ाई करते थे। यही कारण था कि उन्होंने 2012 में एसएससी ग्रेजुएट लेवेल परीक्षा में सफलता हासिल की और उन्हें सेंट्रल एक्साइज और कस्टम मिला। इसके बाद विजय का चयन 2014 में भी इस परीक्षा में हुआ जिसमें उन्हें इनकम टैक्स इंस्पेक्टर का पद मिला लेकिन विजय का सफर यहीं रुका। अपनी इस सफलता से विजय ने अपने इरादों को डगमगाने नहीं दिया और अपनी पढ़ाई जारी रखी।

मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता हौसले से उड़ान होती है, जी विजय ने इस कथन को यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा 2017 में 574वीं रैंक (कैटेगरी-ओबीसी) लाकर साबित किया है। उन्हें आईपीएस मिलने की संभावना है। इस सफलता का श्रेय विजय ने अपने माता-पिता और मार्गदर्शक कमल देव सिंह को दिया है। उन्होंने कहा कि इस सफलता में निर्माण आईएएस के निदेशक कमलदेव सिंह का अहम योगदान है और हर कदम पर उन्होंने प्रोत्साहन दिया। विजय ने कहा है कि सही रणनीति से ही इस परीक्षा में सफलता हासिल की जा सकती है। उन्होंने कहा कि सिविल सेवा की तैयारी करने वालों को कभी भी आत्मबल नहीं खोना चाहिए। आत्मबल ही कामयाबी का मूलमंत्र है।

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