मार्शल अर्जन सिंह का शनिवार की शाम 98 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. सिंह भारतीय वायुसेना के एक मात्र अधिकारी थे जिनकी पदोन्नति पांच सितारा रैंक तक हुई। वह 1964 से 1969 तक भारतीय वायुसेना के चीफ रहे थे। आइए उनके बारे में विस्तार से जानते हैं…

– वअर्जन सिंह का जन्म 15 अप्रैल 1919 को फैसलाबाद, पाकिस्तान में हुआ था। 1938 को 19 साल की उम्र में उनका चयन पायलट ट्रेनिंग के लिए हुआ।
1944 में उन्हें स्क्वॉड्रन लीडर बनाया गया। उन्होंने अराकान कैंपेन के दौरान जपानियों के खिलाफ टीम का नेतृत्व किया।

– आजादी के बाद 15 अगस्त 1947 को सिंह को दिल्ली के लाल किले के ऊपर से 100 IAF एयरक्राफ्ट्स के फ्लाई-पास्ट का नेतृत्व करने का मौका मिला।
1949 में सिंह ने एयर ऑफिसर कमांडिंग ऑफ ऑपरेशनल कमांड का जिम्मा संभाला। इसे ही बाद में वेस्टर्न एयर कमांड कहा गया।

– 1965 में पहली बार जब एयरफोर्स ने जंग हिस्सा लिया तो अर्जन सिंह ही उसके चीफ थे। उनके नेतृत्व में ही एयरफोर्स ने एक घंटे के भीतर ही पाकिस्तानी फौज पर हमला बोला था।

– अर्जन सिंह को 2002 में एयरफोर्स का पहला और इकलौता मार्शल बनाया गया। वे एयरफोर्स के पहले फाइव स्टार रैंक अधिकारी बने। 1965 की जंग में उनके योगदान के लिए भारत ने उन्हें इस सम्मान से नवाजा था।

-उन्हें 1965 में ही पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया। सिंह 1 अगस्त 1964 से 15 जुलाई 1969 तक चीफ ऑफ एयर स्टाफ रहे। उन्होंने भारतीय वायुसेना को सशक्त बनाने में अहम भूमिका अदा की और उसे विश्व की चौथी बड़ी वायुसेना बनाया।

– सिंह ने दिल्ली के पास अपने फार्म को बेचकर 2 करोड़ रुपए ट्रस्ट को दे दिए। ये ट्रस्ट सेवानिवृत्त एयरफोर्स कर्मियों के कल्याण के लिए बनाया गया था। सिंह दिसंबर 1989 से दिसंबर 1990 तक दिल्ली के उपराज्यपाल भी रहे।

– 27 जुलाई, 2015 को पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम के निधन के बाद अंतिम दर्शन के लिए राष्ट्रपति और पीएम समेत कई नेता पहुंचे थे। अर्जन सिंह व्हीलचेयर पर उन्हें दर्शन करने पहुंचे थे। कलाम को देखते ही खुद चलकर पास आए और तनकर सलामी भी दी थी।

एक घंटे में हमले के लिए वायुसेना को कर दिया था तैयार

सितंबर 1965 में पाकिस्तान ने ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम के तहत भारत पर हमला बोल दिया था। अखनूर जैसे अहम शहर को निशाना बनाया गया। उस समय रक्षा मंत्री ने वायुसेना प्रमुख रहे अर्जन सिंह को अपने दफ्तर में बुलाया और एयर सपोर्ट मांगा। अर्जन सिंह से पूछा गया कि वायुसेना को तैयारी में कितना वक्त लगेगा। अर्जन सिंह का जवाब था- एक घंटा.. और उसी के मुताबिक वायुसेना ने एक घंटे के अंदर पाकिस्तान पर हमला बोल दिया।

15 अगस्त, 1947 को किया था फ्लाई पास्ट का नेतृत्व

मार्शल अर्जन सिंह भारतीय सैन्य इतिहास के ऐसे सितारे थे, जिन्होंने 1965 के भारत–पाकिस्तान युद्ध में सिर्फ 44 वर्ष की उम्र में अनुभवहीन भारतीय वायुसेना का नेतृत्व किया था। यही नहीं, देश को आजादी मिलने के बाद 15 अगस्त, 1947 को लालकिले के ऊपर सौ से ज्यादा वायुसेना विमानों के फ्लाइपास्ट का नेतृत्व करने का गौरव भी उन्हें हासिल था। उन्हें एक अगस्त, 1964 को चीफ ऑफ एयर स्टाफ (सीएएस) नियुक्त किया गया था। वह ऐसे पहले सीएएस थे, जिन्होंने वायुसेना प्रमुख बनने तक अपनी फ्लाइंग कैटेगरी को बरकरार रखा।

1969 में वायुसेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें 1971 में स्विट्जरलैंड में भारत का राजदूत नियुक्त किया गया। इसके बाद 1974 में केन्या में भारतीय उच्चायुक्त नियुक्त किए गए। 1989 में दिल्ली के उपराज्यपाल भी बने। 2002 में उनकी सेवाओं के लिए उन्हें मार्शल की रैंक प्रदान की गई। युद्ध में कुशल नेतृत्व के लिए उन्हें पद्म विभूषण से भी नवाजा गया था।

पाकिस्तान के लयालपुर में हुआ था जन्म

अर्जन सिंह का जन्म 15 अप्रैल, 1919 को अविभाजित भारत के लयालपुर, पंजाब में हुआ था। लयालपुर इस वक्त पाकिस्तान के फैसलाबाद में है। उनका परिवार सैन्य सेवा में था।

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