प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को बहुप्रतीक्षित सरदार सरोवर बांध का लोकार्पण कर दिया। सरदार सरोवर बांध की नींव 5 अप्रैल 1961 को देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने रखी थी। सरदार सरोवर बांध 138 मीटर ऊंचा है। इसकी लंबाई 1210 मीटर है। इसमें कुल 30 गेट लगे हैं। केन्द्र और राज्य सरकारों के दावों को मानें, तो इस बांध से गुजरात के अलावा महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान की जनता को लाभ मिलेगा। लेकिन मध्य प्रदेश के बांध प्रभावित कहते हैं कि यह बांध मूल रूप से गुजरात के लोगों के लिए ही बना है। सरदार सरोवर बांध दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बांध है। यूएस का ग्रांड कोली डेम दुनिया का सबसे बड़ा बांध है। सरदार सरोवर बांध की 4.73 मिलियन क्यूबिक पानी स्टोर करने की क्षमता है।

सरदार सरोवर नर्मदा बांध परियोजना के महत्वपूर्ण घटनाक्रम

– ‘लौह पुरुष’ सरदार वल्लभाई पटेल ने गुजरात में सिंचाई के संकट को देखते हुए नर्मदा पर बांध बनवाने की योजना बनाई थी तथा आजादी के पहले ही 1946 में उन्होंने अंतरिम सरकार में आने के बाद इस परियोजना के लिए अध्ययन करवाया।

– 1959 में बांध के लिए औपचारिक प्रस्ताव बना.5 अप्रैल, 1961 को तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इसकी आधारशिला रखी।

– राज्यों के बीच विवाद होने पर गुजरात एवं मध्य प्रदेश के बीच नवंबर 1963 में समझौता हुआ तथा सितंबर 1964 में डॉ एएन खोसला ने अपनी रिपोर्ट सौंपी।
जुलाई 1968 में गुजरात ने अंतर-राज्यीय जल विवाद कानून के तहत पंचाट गठित कराने की मांग की। अक्टूबर, 1969 में नर्मदा जल विवाद पंचाट बना। 12 जुलाई, 1974 को गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र एवं गुजरात के बीच बांध को लेकर समझौता हुआ।

– 12 सितंबर, 1979 को पंचाट का अंतिम निर्णय.अप्रैल, 1987 में बांध निर्माण का ठेका दिया गया। 1995 में सुप्रीम कोर्ट ने बांध की ऊंचाई 80.3 मीटर से अधिक करने पर रोक लगाई। 1998-99 में बांध को 85 मीटर तक ऊंचा बनाने की अनुमति दी गई।

– सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर, 2000 में परियोजना के चरणबद्ध तरीके से तेजी से निर्माण की अनुमति दी। 2001 में बांध की ऊंचाई 90 मीटर कर दी गई। जून, 2004 तक बांध की ऊंचाई 110.4 मीटर की गई।

– 8 मार्च, 2006 को नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण (एनसीए) ने बांध की उंचाई बढ़ाकर 121.92 मीटर करने की अनुम​ति दी। मार्च, 2008 में बांध से निकलने वाली मुख्य नहर राजस्थान तक पहुंची। 12, जून 2014 को नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण (एनसीए) ने बांध को पूरी ऊंचाई तक बनाने एवं गेट लगाने की अनुमति दी।

– 10 जुलाई, 2017 को बांध के सभी 30 गेट लगाए गए। सुप्रीम कोर्ट ने 8 फरवरी, 2017 को परियोजना से प्रभावित लोगों के पुनर्वास के काम को तीन माह में पूरा करने का निर्देश दिया। सितंबर, 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सरदार सरोवर नर्मदा बांध परियोजना का लोकार्पण हुआ। बांध के 30 दरवाजे हैं। हर दरवाजे का वजन 450 टन है। हर दरवाजे को बंद करने में एक घंटे का समय लगता है।

– इससे 6000 मेगावॉट बिजली पैदा होगी। बिजली का सबसे अधिक 57% हिस्सा मध्य प्रदेश को मिलेगा। महाराष्ट्र को 27% और गुजरात को 16% बिजली मिलेगी। इससे राजस्थान के 4 करोड़ लोगों की प्यास बुझेगी।

– इस परियोजना से 18 लाख हेक्टेयर जमीन को लाभ होगा नर्मदा के पानी से नहरों के जरिए 9,000 गांवों में सिंचाई की जा सकेगी। बांध बनाने में 86.20 लाख क्यूबिक मीटर कंक्रीट लगा है इससे पृथ्वी से चंद्रमा तक सड़क बनाई जा सकती थी।

– पानी डिस्चार्ज करने की क्षमता के लिहाज से ये दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बांध है। प्रोजेक्ट से जुड़ी 532 किलोमीटर लंबी नर्मदा मुख्य नहर दुनिया की सबसे लंबी सिंचाई नहर है।

परियोजना से जुड़े विवाद

– सरदार सरोवर बांध के विरोध में मेधा पाटेकर की अगुवाई में नर्मदा बचाओ आंदोलन वजूद में आया। आंदोलन का कहना था कि इस प्रोजेक्ट से दो लाख से ज्यादा लोग विस्थापित होंगे और क्षेत्र के पर्यावरण तंत्र पर प्रभाव पड़ेगा। कुछ वैज्ञानिकों ने ये भी दलील दी कि बड़े बांधों के निर्माण से भूकंप का ख़तरा बढ़ सकता है। बांध विरोधी कार्यकर्ताओं को उस समय बड़ी कामयाबी मिली जब 1993 में विश्व बैंक ने सरदार सरोवर परियोजना से अपना समर्थन वापस ले लिया.।
अक्टूबर, 2000 में सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी के बाद सरदार सरोवर बांध का रुका हुआ काम एक बार फिर से शुरू हुआ।

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