यूनेस्को ने कुंभ मेले को सांस्कृतिक विरासत सूची (इनटैन्जिबल कल्चरल हेरिटेज लिस्ट) में शामिल किया है। यूनेस्को ने इसे सबसे शांतिपूर्ण धार्मिक आयोजन बताते हुए कहा कि यह सांस्कृतिक रूप से विविधताओं से भरपूर पर्व है जहां प्राचीन परंपराओं के माध्यम से ज्ञान का आदान-प्रदान होता है। भारत में कुंभ मेले का आयोजन महाराष्ट्र के नासिक- त्रयंबकेश्वर (गोदावरी नदी के किनारे), यूपी के प्रयाग (इलाहाबाद), हरिद्वार (गंगा नदी के किनारे) और मध्यप्रदेश के उज्जैन (महाकालेश्वर) में क्षिप्रा नदी के किनारे होता है। आपको बता दें कि महाकालेश्वर और त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग हैं।

महाकुंभ का आयोजन प्रत्येक 12 साल में होता है। वहीं, प्रयाग और हरिद्वार में प्रत्येक 6 साल में अर्द्धकुंभ का आयोजन किया जाता है। कुंभ मेले में देशभर से लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। इलाहाबाद में 2019 में अर्धकुंभ आयोजित होना है। इस अर्धकुंभ को लेकर तैयारियों शुरू कर दी गई हैं।

इसके साथ ही कुंभ मेला, बोत्सवाना, कोलंबिया, वेनेजुएला, मंगोलिया, मोरक्को, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात की सूची में शामिल हो गया। यूनेस्को के अधीनस्थ संगठन इंटरगर्वनमेंटल कमिटी फोर द सेफगार्डिंग ऑफ इन्टेंजिबल कल्चरल हेरीटेज ने दक्षिण कोरिया के जेजू में हुए अपने 12वें सत्र में कुंभ मेले को ‘मावनता के अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की प्रतिनिधि सूची’ में शामिल किया। चार दिसंबर से शुरू हुआ यह सत्र नौ दिसंबर तक चलेगा।

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