उत्तराखंड के पिथौरागढ़ के छोटे से गांव की रहने वाली शीतल राज ने कम उम्र में ही नाम इतिहास रच दिया है। बचपन से ही पहाड़ों से प्यार करने वाली शीतल कंचनजंगा पर्वत पर चढ़ाई करने वाली सबसे कम उम्र की महिला बन गई हैं। शीतल राज अभी महज 22 साल की हैं और उन्होंने दुनिया के तीसरे सबसे ऊंचे पर्वत की चढ़ाई की है।

माउंट एवरेस्ट और K2 के बाद कंचनजंगा दुनिया का तीसरा सबसे ऊंचा पर्वत है।

उन्होंने अपना पहला अभियान साल 2014 में कॉलेज के जरिए पूरा किया। कंचनजंगा के लिए शीतल राज का अभियान अप्रैल में निकला था। नेपाल पहुंचने के बाद इस अभियान के लोगों ने बेस कैंप के लिए चढ़ाई शुरू की जिसमें उन्हें 15 दिन लग गए। बेस कैंप से उन्होंने आगे के लिए चढ़ाई शुरू की जो काफी मुश्किल थी। कई बार उन्हें खराब मौसम की वजह से चढ़ाई रोकनी भी पड़ी।

SHEETAL RAJ WITH FELLOW MOUNTAINEER

कैंप 4 में पहुंचने में शीतल के ग्रुप को दो दिन का समय लग गया, जिसके बाद उन्होंने कंचनजंगा पर्वत के लिए चढ़ाई शुरू की। मई को सुबह 3:30 बजे शीतल और उनका ग्रुप कंचनजंगा की चोटी पर पहुंचा। कंचनजंगा को फतह करने पर शीतल ने कहा, ‘मुझे ऐसा लगा मैं घर में हूं। उस वक्त बहुत अंधेरा था, इसलिए हमने सूर्योदय तक का इंतजार किया। सूर्योदय के बाद जो नजारा दिखा वो अद्भुत था। एक तरफ हम भारत देख पा रहे थे और एक तरफ नेपाल था, और हमारे सामने चीन का बॉर्डर। वो एक अलग ही अनुभव था।

संघर्ष भरी है शीतल की कहानी

उनके पिता ने इसके लिए काफी संघर्ष किया है। शीतल पिथौरागढ़ के एक छोटे से गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता ड्राइवर और मां गृहणी हैं। शीतल को हमेशा से ही पहाड़ों से काफी लगाव था और उन्होंने अपना पहला अभियान साल 2014 में कॉलेज के जरिये पूरा किया। शीतल के परिवारवाले उन्हें इसके लिए भेजने को बिल्कुल राजी नहीं थे, लेकिन शीतल अपनी जिद पर अड़ी रहीं और आखिर में घरवालों को उनके आगे झुकना पड़ा।

MOUNTAINEER SHEETAL RAJ

इस अभियान पर जाने के बाद तो जैसे शीतल के पैर रुके ही नहीं। उन्होंने डार्जलिंग में हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट से माउंटेनियरिंग में कोर्स किया और इसके बाद कई अभियान पर गईं और सभी में पास भी हुईं। अगला टारगेट – माउंट एवरेस्ट प्री-एवरेस्ट माउंट त्रिशूल को पूरा करने के बाद शीतल को पूरी उम्मीद थी कि उनका माउंट एवरेस्ट अभियान के लिए भी सलेक्शन हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सलेक्शन न होने पर शीतल इतनी डिप्रेशन में चली गईं कि उन्होंने अपना कॉलेज तक छोड़ दिया। एक साल तक डिप्रेशन से लड़ने के बाद शीतल ने आखिर इंडियन माउंटेनियरिंग फाउंडेशन में मेंबरशिप के लिए अप्लाई किया और उसकी तरफ से कई अभियान का हिस्सा बनीं।

इसके बाद ही शीतल को ओएनजीसी के लिए कंचनजंगा जाने का मौका मिला। शीतल की नजरें अब दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत माउंट एवरेस्ट पर है। माउंट एवरेस्ट तक पहुंचने में करीब 20-25 लाख का खर्चा आएगा, जिसके लिए शीतल फिलहाल स्पॉन्सरशिप ढूंढ रही हैं।

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