वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संसद में बताया है कि सरकारी बैंकों की मर्जर प्रक्रिया से किसी की भी नौकरी नहीं जाएगी। उन्होंने बताया कि विजया बैंक और देना बैंक का बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय होने के बाद नौकरियों में कटौती नहीं की जाएगी। जेटली कहा कि इससे एसबीआई जैसा बड़ा बैंक बनेगा और ऋण दरें भी घट सकती हैं।

लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान जेटली ने कहा कि 21 सरकारी बैंकों में से 11 त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) के दायरे में हैं। दरअसल, पीसीए के अंतर्गत उन बैंकों को रखा जाता है जिनकागैर निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) का स्तर काफी ज्यादा होता है। जेटली ने कहा कि इससे एनपीए का वक्र नीचे आ जाएगा और इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड ने सिस्टम में लगभग ₹3 लाख करोड़ वापस लाने में मदद की है।

जेटली ने कहा कि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक परिचालन लाभ कमा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गैर निष्पादित आस्तियों (एनपीए) के प्रावधान के कारण उन्हें नुकसान हुआ है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के पुर्नपूंजीकरण के संबंध में मंत्री ने कहा कि चालू वित्‍त वर्ष के दौरान 31 दिसंबर तक बैंकों को ₹51,533 करोड़ की पूंजी दी जा चुकी है।

बजट अनुमान में वित्‍त वर्ष 2018-19 में सरकारी बैंकों को पुर्नपूंजीकरण के लिए ₹65,000 करोड़ आवंटित किए गए थे, जिसमें से 31 दिसंबर तक ₹51,533 करोड़ दिए जा चुके हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि हाल के दिनों में केंद्रीय बजट में ₹90,000 करोड़ आवंटित किए गए थे और वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान सरकार द्वारा विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों में इसका इस्तेमाल किया गया था।

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