उत्तर कोरिया ने हाइड्रोजन बम का सफल परीक्षण करने का दावा किया है जिसकी पहुंच अमेरिका तक है। हालांकि, जापान- दक्षिण कोरिया ने इसे परमाणु परीक्षण बताया है। उत्तर कोरिया का यह छठा परमाणु परीक्षण किया है। इस बम को अंतरमहाद्वीपीय बैलेस्टिक मिसाइल पर लोड किया जा सकता है। यह उसका छठा परमाणु परीक्षण है। यह 1945 में नागासाकी में गिराए गए बम से चार-पांच गुना ज़्यादा शक्तिशाली है। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, उत्तर कोरिया की न्यूक्लियर टेस्ट साइट के पास 6.3 तीव्रता के ‘कृत्रिम भूकंप’ के झटके रिकॉर्ड किए गए। वहीं, जापान ने इस परमाणु परीक्षण की पुष्टि करते हुए कहा कि यह माफी के काबिल नहीं है।

जापान के विदेश मंत्री तारो कोनो ने रिपोर्टर को बताया कि सरकार मौसम एजेंसी की सूचना और अन्य सूचनाओं के बाद इस बात की पुष्टि करती है कि उत्तर कोरिया ने परमाणु परीक्षण किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने पुष्टि से पहले बीजिंग में उत्तर कोरियाई दूतावास में विरोध दर्ज करा दिया है और कहा है कि किसी भी परीक्षण को बिल्कुल क्षमा नहीं किया जाएगा।

न्यूज एजेंसी एएफपी के मुताबिक, इस धमाके की ताकत पिछले या पांचवें परीक्षण से 9.8 गुना ज्यादा थी। भूकंप वैज्ञानिकों को उस जगह जमीन हिलने का पता चला है जहां उत्तर कोरिया ने पिछले परमाणु परीक्षण किए थे। चीन और अमेरिका ने भी इसे एक ‘विस्फोट’ बताया है।

उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ क्या-क्या कार्रवाई हो सकती है। आइए डालते हैं उन पर नज़र…

पहला विकल्प: ज़मीनी हमला

यह कार्रवाई सबसे कम घातक और सबसे कम प्रभावी कार्रवाई का विकल्प हो सकती है। इसके द्वारा उत्तर कोरिया के बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों को रोकने में कम ही सफ़लता मिलेगी। इसमें अमरीका अपनी ज़मीनी सेना को दक्षिण कोरिया में स्थापित कर सकता है। साथ ही ज़मीनी मिसाइल और भारी हथियारों को भी तैनात कर सकता है। हालांकि, दक्षिण कोरिया ऐसा कम ही करना चाहेगा। पहली वजह यह है कि दक्षिण कोरिया ने अपनी थाड मिसाइलों को तैनात कर रखा है और अमरीकी फ़ौजों के उसकी ज़मीन पर आने से उत्तर कोरिया भड़क सकता है। वैसे अमरीका और दक्षिण कोरिया युद्धाभ्यास करते रहे हैं और उस पर उत्तर कोरिया की प्रतिक्रिया भी आती रही है। ऐसी कार्रवाई पर चीन और रूस अमरीका की आलोचना भी कर सकते हैं। अमरीका अपनी नौसेना के ज़रिए कोरिया के नज़दीक समुद्र में मौजूद है। वह अपने युद्धपोतों के अलावा अपनी वायुसेना का प्रयोग भी उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ कर सकता है।

उत्तर कोरिया की मिसाइल से डरना ज़रूरी क्यों?

इसके अलावा उत्तर कोरिया की क्षमता पर भी शक नहीं करना चाहिए क्योंकि कोरियाई समुद्र में अमरीका की ताक़त सीमित ही है जबकि उत्तर कोरिया के पास काफ़ी संख्या में बैलिस्टिक मिसाइल हैं। इस तरह की नीति काफ़ी ख़र्चीली हो सकती है। साथ ही इसमें शक है कि यह उत्तर कोरिया को अधिक चुनौती दे पाए।

दूसरा विकल्प: सर्जिकल स्ट्राइक

अमरीका की नौसेना और वायुसेना के पास इस धरती के किसी भी हिस्से में सबसे उन्नत सर्जिकल स्ट्राइक करने की क्षमता है। टॉमहॉक मिसाइल और बी-2 बॉम्बर्स के हमले से उत्तर कोरिया के परमाणु स्थल नष्ट हो सकते हैै। हालांकि, उत्तर कोरिया का एयर डिफेंस नेटवर्क भी बड़ा है जिसमें सोवियत संघ और वर्तमान रूस के मिश्रित हथियार हैं। साथ ही उसके पास ज़मीन से हवा मे मार करने वाली मिसाइल और उन्नत रडार सिस्टम है। उत्तर कोरिया की रक्षा प्रणाली भी खासी मज़बूत है। अगर अमरीकी विमान उत्तर कोरिया में गिरते हैं तो उसके चालक दल को निकालना मुश्किल होगा। उत्तर कोरिया की पीपुल्स आर्मी अमरीका की साथी दक्षिण कोरिया से बदला भी ले सकती है। उत्तर कोरिया के पास लाखों सैनिक हैं जिसमें से केवल 60 लाख रिज़र्व और पैरामिलिट्री के जवान हैं। उत्तर कोरिया अगर दक्षिण कोरिया पर हमला कर देता है तो उसके निशाने पर राजधानी सियोल के एक करोड़ लोग होंगे।

तीसरा विकल्प: व्यापक हमला

उत्तर कोरिया पर हमला करने के लिए अमरीका को एक महीने की तैयारी करनी होगी और साथ ही उसको इसमें दक्षिण कोरिया का पूरा सहयोगा चाहिए होगा।इसके अलावा उत्तर कोरिया की रहस्यमय परमाणु क्षमताओं को विफल करने की भी पूरी जानकारी ज़रूर होनी चाहिए। इसमें दोनों ओर की हज़ारों जानें भी जा सकती हैं। साथ ही भारी बमबारी की भी आवश्यकता पड़ेगी। वहीं, उत्तर कोरिया की पीपुल्स आर्मी के पास दक्षिण कोरिया में घुसपैठ की लंबी ट्रेनिंग है जिसका पता लगा पाना काफ़ी मुश्किल है। इसके कारण बड़े पैमाने पर संघर्ष की स्थिति पैदा हो जाएगी। हालांकि, उच्च तकनीक वाले अमरीका और दक्षिण कोरियाई सेना को भी नुकसान होगा। 1950 में कोरियाई युद्ध के समय अमरीका और उसके सहयोगियों ने उत्तर कोरिया पर बढ़त बनाई थी। वहीं, उत्तर कोरिया की ओर से चीन युद्ध में शामिल हुआ था। इस तरह की तस्वीर अगर इस बार बनती है तो इस बार चीन इसमें शामिल होता नहीं दिखेगा।

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