आज ही के दिन हुआ था प्रथम भारतीय अंतरिक्षयात्री राकेश शर्मा का जन्म, जानें अनसुनी बातें…

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13 जनवरी 1949 को पटियाला (पंजाब) में जन्मे भारत के पहले अंतरिक्षयात्री राकेश शर्मा को 1984 में भारत-रूस के संयुक्त अभियान के तहत अंतरिक्ष में भेजा गया था। उन्होंने इस दौरान अंतरिक्ष में 7 दिन, 21 घंटे और 40 मिनट बिताए थे और 43 परीक्षण भी किए थे। शर्मा को 1984 में अशोक चक्र से सम्मानित किया गया था।

31 दिसंबर 1984 को अगर किसी ने बीते साल का लेखा-जोखा लिखा होगा तो क्या लिखा होगा। यही कि इस साल ने इंदिरा गांधी की हत्या देखी। इस साल ने इंदिरा की हत्या के बाद भड़के दंगे देखे और इसी साल ने भोपाल गैस त्रासदी देखी। लेकिन एक घटना थी, जिसने इस साल के दिए जख्मों पर कुछ हद तक मरहम लगाने का काम किया। मुस्कुराने का, फख्र का पल दिया. और वो  था राकेश शर्मा का अंतरिक्ष में कदम…

राकेश शर्मा के लिए कहा जाता था कि वो बचपन में आसमान में उड़ते विमानों को बड़े गौर से देखते और देखते रहते जब तक वो आंखों से ओझल न हो जाएं। इस बात पर पूरी तरह भरोसा करने को जी चाहता है क्योंकि हो न हो वो उन दिनों में जेहनी तौर पर आसमान में ही चक्कर लगा रहे होंगे! राकेश शर्मा ने 1966 में NDA पास कर इंडियन एयर फोर्स कैडेट बने। फिर यही से उनकी किस्मत ने यू-टर्न लिया और राकेश ने कुछ ऐसा कर दिखाया कि आज उनके नाम से हर भारतीय का सीना फक्र से चौड़ा हो जाता है।

21 साल की उम्र में भारतीय वायु सेना में पायलट बन गए और अगले ही साल पाकिस्तान के साथ युद्ध छिड़ गया। इस छोटी सी उम्र में राकेश शर्मा ने युद्ध के दौरान 20 से ज्यादा उड़ानें भरीं। कुछ ही साल में राकेश शर्मा का शुमार, एयर फोर्स के सबसे बेहतरीन पायलटों में होने लगा।

यही दौर था जब देश अपना अंतरिक्ष कार्यक्रम शुरू करने के बारे में गंभीरता से सोच रहा था। इसमें मदद मिली भारत के दोस्त सोवियत रूस की। जब ये तय हो गया कि भारत से एक शख्स को सोवियत रूस के स्पेस यान के जरिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा, तब खोज शुरू हुई ऐसे पायलट की। एक कड़े इम्तेहान के बाद राकेश शर्मा और रवीश मल्होत्रा को चुन लिया गया। राकेश और रवीश को ट्रेनिंग के लिए रूस भेजा गया और फिर वो पल भी आया जब इतिहास रचा जाना था।

3 अप्रैल 1984 को स्पेसशिप सोयूज टी-11 मे सवार हुए। सोयूज ने सोवियत रूस के बैकानूर से उड़ान भरी और कामयाबी से तीनों अंतिरक्ष यात्रियों को ऑर्बिटल स्टेशन सैल्यूट-7 में पहुंचा दिया। तीन यानी राकेश शर्मा, यूरी माल्याशेव और गेनाडी सट्रेकलोव। राकेश शर्मा पूरे 7 दिन 21 घंटे और 40 मिनट तक अंतरिक्ष में रहे। अपने मिशन के दौरान राकेश शर्मा ने कई अहम प्रयोग किए खासकर रिमोट सेंसिंग के क्षेत्र में। वो अंतरिक्ष में चहलकदमी करने वाले दुनिया के 128वें इंसान थे और भारत के पहले।

तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जब राकेश शर्मा से पूछा कि अंतरिक्ष ने भारत कैसा दिखता है तो इसके जवाब में शर्मा ने कहा, ‘सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तां हमारा।’ सुनिए ये दिलचस्प बातचीत नीचे दिए वीडियो में:

सुनिए ये दिलचस्प बातचीत नीचे दिए वीडियो में:

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार अंतरिक्ष में जाने से एक साल पहले राकेश शर्मा और रवीश मल्होत्रा स्टार सिटी गए थे जो कि मास्को से 70 किलोमीटर दूर था और अंतरिक्ष यात्रियों का प्रशिक्षण केंद्र था। राकेश के अनुसार वहां बहुत ठंड थी। हमें बर्फ में एक इमारत से दूसरी इमारत तक पैदल जाना होता था। उनके सामने जल्दी से जल्दी रूसी भाषा सीखने की चुनौती थी। क्योंकि ज्यादातर उनकी ट्रेनिंग रूसी भाषा में ही होने वाली थी। हर दिन वो छह से सात घंटे रूसी भाषा सीखते थे। इसका असर यह हुआ कि उन्होंने तीन महीने में ठीक-ठाक रूसी सीख ली थी।

जब सोवियत संघ ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सामने दो भारतीयों के उनके मिशन में शामिल होने का प्रस्ताव रखा। इंदिरा गांधी के पास वायूसेना के अफसरों के अलावा कोई विकल्प नहीं था। ISRO के पास तब इतने संसाधन नहीं थे। ऐसे में वायुसेना के दो अफसरों को 18 महीने की लंबी ट्रेनिंग दी गई। जिसमें राकेश शर्मा के साथ गए रवीश मल्होत्रा उनके साथ ही इस मिशन में शामिल रहे।

अंतरिक्ष से वापस लौटने के बाद सोवियत सरकार ने उन्हें ‘हीरो ऑफ़ सोवियत यूनियन’ के सम्मान से नवाजा गया। भारत सरकार ने उन्हें शांति-काल के सबसे उच्च बहादुरी पुरस्कार ‘अशोक चक्र’ से सम्मानित किया। विंग कमांडर के पद पर सेवा-निवृत्त होने पर राकेश शर्मा ने हिन्दुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड में परीक्षण विमानचालक के रूप में काम किया।

पर्सनल लाइफ

राकेश का विवाह सेना के अवकाश प्राप्तट कर्नल पी. एन. शर्मा की सुपुत्री मधु शर्मा से हुआ। अपने रूस प्रवास के दौरान दोनों ने रूसी भाषा सीखी। उनके पुत्र कपिल एक निर्देशक है और पुत्री कृतिका एक मीडिया कलाकार।

राकेश शर्मा पर बन रही है फिल्म

भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा पर बनने वाली बायोपिक ‘सैल्यूट’ में अब आमिर खान की जगह शाहरुख खान नजर आएंगे। इस फिल्म को सिद्धार्थ रॉय कपूर प्रोड्यूस कर रहे हैं और इसका निर्देशन महेश मथाई करेंगे।

एस्ट्रोनॉट के किरदार में दिखेंगे शाहरुख

लंबी चर्चा के बाद शाहरुख ने इस फिल्म में राकेश शर्मा का किरदार निभाने की हामी भर दी है। ऐसे में अब फिल्म सैल्यूट में शाहरुख एस्ट्रोनॉट के किरदार में नजर आएंगे। हालांकि ये पहली बार नहीं होगा। शाहरुख इससे पहले आशुतोष गोवारिकर की फिल्म ‘स्वदेस’ में नासा के वैज्ञानिक का रोल कर चुके हैं।

(साभार-क्‍व‍िंट हिंदी)

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