सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में मिले अंकों की जानकारी सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत देने के लिए यूपीएससी बाध्य नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में कुछ याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पिछले फरवरी में फैसला सुनाया था। उसी फैसले के खिलाफ दायर रिव्यू पिटीशन को खारिज करते हुए जस्टिस यूयू ललित की अध्यक्षता वाली बेंच ने ये फैसला सुनाया है।

रिव्यू पिटीशन की गई खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यूपीएससी की परीक्षा की गोपनीयता बरकरार रखी जानी चाहिए और इसे आरटीआई के तहत नहीं लाया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि हमारे पहले के आदेश में कोई गड़बड़ी नहीं दिखाई देती है इसलिए रिव्यू पिटीशन खारिज की जाती है। जस्टिस उदय यू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, “हम समीक्षा याचिकाओं की सारी चीजें देख चुके हैं। हमें इसमें कोई गलतियां नहीं दिख रही है।”

इससे पहले फरवरी में जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और उदय यू ललित की बेंच ने इस मामले पर अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि अंकों को सार्वजनिक करने का गहरा नकरात्मक असर मूल्यांकन प्रक्रिया पर पड़ सकता है। इससे न केवल प्रतिष्ठा बल्कि सिस्टम की अखंडता के साथ समझौता करने के बराबर होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दूसरे शैक्षणिक निकायों की परीक्षाओं की स्थिति अलग होती है। हालांकि, खंडपीठ ने कहा कि अगर कोई मामला सामने आया है, जहां लगता है कि सार्वजनिक हित में जानकारी देने की आवश्यकता है, तो कोर्ट निश्चित रूप से ऐसा करने के लिए हकदार है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था ‘सूचना का अधिकार, जनहित, सरकार के कुशल कामकाज, वित्तीय संसाधनों का बेहतर उपयोग और संवेदनशील जानकारी की गोपनीयता में संतुलन बनाना ज़रूरी है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने छात्रों को दी थी राहत

बता दें कि यूपीएससी की परीक्षा देने वाले कुछ अभ्यर्थियों ने पहले दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें राहत देते हुए परीक्षा में मिले अंकों की सूचना आरटीआई के तहत देने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ यूपीएससी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

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