संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने सिविल सर्विस परीक्षा 2017 का अंतिम परिणाम घोषित कर दिया है जिसमें डुरीशेट्टी अनुदीप ने प्रथम स्थान हासिल किया है। वहीं, अनु कुमारी को इस परीक्षा में दूसरा और सचिन गुप्ता को तीसरा स्थान हासिल हुआ है। इस परीक्षा में 180 आईएएस, 42 आईएफएस (विदेश सेवा) और 150 आईपीएस अधिकारियों का चयन हुआ। लेकिन इनमें से कुछ छात्र ऐसे भी हैं जिन्होंने ‘जिंदगी में कुछ भी हो सकता है, अगर करने की चाहत और जूनून हो’ के वाक्य को सही साबित किया। आइए हम उन्हीं में से कुछ छात्रों के बारे में बताते हैं…

4 साल के बच्चे की मां हैं सेकंड टॉपर अनु

मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता हौसले से उड़ान होती है। इस तथ्य को अनु कुमारी ने साबित कर दिखाया है।


हमारे समाज में यह धारणा है कि शादी के बाद लड़की की जिंदगी अपनी गृहस्थी तक ही सीमित हो जाती है और उसका करियर नाम मात्र का बचता है। लेकिन चार साल के बच्चे की मां होने के बाद भी दूसरी रैंक हासिल कर अनु ने इन बातों को झूठा साबित कर दिया है। 31 साल की अनु की एक बिजनसमैन से शादी हुई है। चार साल पहले वह एक बेटे की मां भी बनीं। अनु ने दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दू कॉलेज से फिजिक्स में ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद उन्होंने आईएमटी नागपुर से एमबीए किया और कुछ दिन गुरुग्राम में एक कंपनी में नौकरी भी की। हालांकि, उनका लक्ष्य सिविल सेवा में जाना था इसलिए उन्होंने नौकरी छोड़कर उसकी तैयारी शुरू कर दी। यूपीएससी की तैयारी करने के लिये अनु ने अपने बेटे को डेढ़ साल तक खुद से दूर अपने माता-पिता के पास भेज दिया था। समाज के लिये कुछ कर गुजरने का जुनून लेकर पढ़ाई करने वाली अनु खुद पुरखास गांव में अपनी मौसी के पास रहीं। प्री-एग्जाम में एक अंक से चूकने के बाद नौकरी छोड़ दी। अनु ने कहा कि उनकी सफलता के पीछे परिवार की सबसे बड़ी भूमिका है। अनु ने बताया कि वह अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों के निभाने के साथ-साथ हर दिन कम से कम 10 से 12 घंटे पढ़ाई करती थीं।

हियरिंग डिसेबिलिटी को नहीं बनने दिया कमजोरी, बनी यूपीएससी की 9वीं टॉपर

हौसले बुलंद हों तो मंजिल मिल ही जाती है, चाहे रास्ते में कितनी भी कठिनाइयां आ जाएं। कुछ ऐसा ही जज्बा दिखाया है सौम्या शर्मा ने…

यूपीएससी की परीक्षा मेें सफलता पाने के लिए लोग कड़ी मेहनत करते हैं। महिलाओं में दूसरी और लिस्ट में 9वीं रैंकिंग हासिल करने वाली सौम्या शर्मा ने भी मिसाल कायम की है। जो अपने जैसी दूसरी लड़कियों के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं क्योंकि वह ‘हियरिंग डिसेबिलिटी’ की शिकार हैं। 23 साल की सौम्या शर्मा ने पश्चिम बिहार के स्कूल से पढ़ाई की और दसवीं क्लास में टॉपर रहीं लेकिन 11 वीं कक्षा में जाने के बाद उन्हें सुनने में दिक्कत आने लगी। ‘हियरिंग डिसेबिलिटी’ने उन्हें घेर लिया। अपनी इस कमजोरी से उन्होंने अपने इरादों को डगमगाने नहीं दिया और अपनी पढ़ाई जारी रखी। दिल्ली के नैशनल लॉ यूनिवर्सिटी से 2017 में उन्होंने ग्रेजुएशन की और लॉ स्टूडेंट रहीं। इसी के साथ सौम्या ने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी की और खास बात यह थी कि उन्होंने इसके लिए कोई केचिंग भी नहीं ली। इतना ही नहीं, परीक्षा के समय वह 103 डिग्री बुखार से तप रही थीं। फिर भी अपने एग्जाम की तरफ पूरी तरह से फोक्स किया और सफलता भी हासिल की।

सौम्या का कहना है कि सिविल सेवा की तैयारी करने वालों को कभी भी आत्मबल नहीं खोना चाहिए। आत्मबल ही कामयाबी का मूलमंत्र है। परीक्षा की तैयारियों के दौरान उन्होंने कभी भी आत्मबल को खोने नहीं दिया। सौम्या के मुताबिक, तैयारी के लिए वह पहले 6-7 घंटे की नींद लेती थीं और पूरा दिन पढ़ाई में लगाती थीं। उनका मानना है कि मां-बाप की सपॉर्ट के बिना यह परीक्षा पास करना मुश्किल था। इसके लिए जमकर परीक्षा की तैयारी की लेकिन जबरदस्ती कभी पढ़ाई नहीं की। जब उनका दिल किया,पढ़ाई की। सौम्या का कहना है कि हर चीज का नोट बनाना जरूरी नहीं है। आगे बढ़ने की यही सोच महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

पिता ने की विदेश में मजदूरी, IAS बन बेटे ने पूरा किया सपना

कई बार जिंदगी में कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है लेकिन अगर ख्वाइश ऊंची हो तो नकुसान को भूलना पड़ता है। कुछ ऐसी ही कहानी है गोपालगंज के सन्नी की…

गोपालगंज के एक गरीब किसान के 27 वर्षीय पुत्र सन्नी कुमार सिंह ने यूपीएससी की परीक्षा में 91वां रैंक हासिल किया है। सनी कुमार सिंह के पिता का नाम प्रभुनाथ सिंह है। प्रभुनाथ सिंह ने बताया कि उनके पास महज 2 बीघा जमीन है। वे अपने बेटे को पढ़ाना चाहते थे लेकिन आर्थिक तंगी की वजह से वे अपने परिवार का खर्च तक नहीं चला पा रहे थे। इकलौते बेटे को पढ़ाने का सवाल था तो अपने बेटे को पढ़ाने के लिए वो सऊदी अरब के रियाद शहर गए। वहां उन्होंने मेहनत मजदूरी कर घर पैसा भेजा। सन्नी ने बी.टेक. करने के बाद हीरो मोटोकोर्प में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की नौकरी की और उसके बाद सन्नी ने मिनिस्ट्री ऑफ़ होम अफेयर्स में बतौर अधिकारी ज्वाइन किया लेकिन उसका मकसद आईएएस बनना था। सन्नी ने यूपीएससी की परीक्षा दी और उसमें उसे 91वां रैंक मिला।

चाय बेचने वाले के बेटे की 82वीं रैंक

– जैसलमेर जिले के सुमलियाली कस्बे में चाय की दुकान लगाने वाले 60 साल के कुशल दान के बेटे देशाल दान ने 82वीं रैंक हासिल की। बेटे की कामयाबी पर खुशी जताते हुए कुशल ने कहा, ‘परिवार के लिए मैंने कड़ी मेहनत की, जिसका अब फल मिला है। मेरे पास चाय पीने आने वाले जब बेटे की सफलता पर बात करते हैं तो संतोष मिलता है।’

किसान की बेटी ने रचा इतिहास

– मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर की रहने वाली तपस्या परिहार की 23वीं ऑल इंडिया रैंक आई है। तपस्या परिहार के पिता किसान हैं और काफी संघर्ष करके उन्होंने बेटी की पढ़ाई कराई है। तपस्या ने नरसिंहगढ़ के केंद्रीय विध्यालय से अपनी स्कूलिंग की है और इसके बाद उन्होंने पुणे के इंडिया लॉ सोसाइटीज लॉ कॉलेज से लॉ की पढ़ाई की। इसके बाद वह यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली आ गईं। उन्होंने अपने सफलता का क्रेडिट पिता विश्वास और मां को दिया है। तपस्या ने बताया, “मेरे परिवार ने मुझे काफी सपोर्ट किया है। उन्होंने मुझे पढ़ाई के लिए कभी मना नहीं किया। उन्हीं के कारण में सफल हो पाई। मैं कोई एक्सट्रा ऑर्डिनरी स्टूडेंट नहीं हूं लेकिन मैं हार्ड वर्क पर विश्वास रखती हूं। मैं जिस सब्जेक्ट को पढ़ती हूं, उस पर पूरा फोकस करती हूं, यही मेरे सफलता का राज है।”

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