आधार कार्ड की अनिवार्यता और इससे जुड़े 2016 के कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली 31 याचिकाओं पर पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अहम फैसला सुनाया। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के नेतृत्व में पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने बहुमत का फैसला सुनाते हुए कहा कि आधार आम आदमी की पहचान है और इसके पीछे की सोच तार्किक है। गौरतलब है कि कोर्ट ने 38 दिनों तक चली लंबी सुनवाई के बाद 10 मई को मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। आइये जानते हैं इस फैसले से जुड़ी 10 बड़ी बातें…

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कुछ शर्तों के साथ ‘आधार’ को संवैधानिक रूप से वैध करार देते हुए कहा कि यह समाज के कमज़ोर व निरक्षर तबके को ताकत देता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि बायोमेट्रिक होने के कारण डुप्लीकेट आधार बनाना नामुमकिन है और इसे खत्म करने से इससे जुड़ी 99% जनसंख्या को परेशानी होगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि आधार की वजह से निजता हनन के सबूत नहीं मिले हैं।

इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बैंक खातों और मोबाइल नंबरों से आधार को जोड़ना ज़रूरी नहीं है लेकिन पैन कार्ड को आधार से जोड़ना अनिवार्य रहेगा। कोर्ट ने आधार को सिम से जोड़ने को लेकर दूरसंचार विभाग द्वारा जारी की गई अधिसूचना को भी असंवैधानिक ठहराया। हालांकि, आधार का इस्तेमाल पहचान पत्र के तौर पर किया जा सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी, एनईईटी, सीबीएसई परीक्षाओं और स्कूलों में दाखिले के लिए आधार की अनिवार्यता को भी खत्म कर दिया है। वहीं, सुनवाई के दौरान जस्टिस ए.के. सीकरी ने कहा कि शिक्षा ही अंगूठे के निशान से हस्ताक्षर की ओर ले गई है और अब टेक्नोलॉजी हस्ताक्षर से दोबारा अंगूठे के निशान की ओर ले जा रही है।

इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने आधार ऐक्ट की धारा 57 को भी रद्द कर दिया जिसके तहत निजी कंपनियां आधार की जानकारी मांग सकती थीं। धारा 57 को असंवैधानिक करार देते हुए कोर्ट ने कहा, “निजी कंपनियों को आधार नंबर का इस्तेमाल करने देने से डेटा के हनन को बढ़ावा मिलेगा।” सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आधार का ऑथेंटिकेशन डाटा सिर्फ 6 महीने तक ही रखा जा सकता है।

आइए जानते हैं कहां होगी आपके आधार की जरूरत और कहां नहीं

– इनकम टैक्स फाइल करने के लिए आधार की आवश्यकता होगी।
– पैन कार्ड को आधार से लिंक करना होगा।
– प्राइवेट फर्म या कंपनी में आधार देने की कोई आवश्यकता नहीं होगी।
– बैंक अकाउंट को लिंक करने की जरूरत नहीं होगी।
– स्कूल में एडमिशन के लिए आवश्यकता नहीं होगी।
– मोबाइल नंबर को लिंक करने की आवश्यकता नहीं होगी।
– सरकार की लाभकारी योजनाओं और सब्सिडी का लाभ पाने के लिए होगी आधार की जरूरत
– सीबीएसई, नीट और यूजीसी की परीक्षाओं में आधार की जरूरत नहीं होगी।
– वहीं 14 साल से कम उम्र के बच्चों के पास आधार न होने की स्थिति में उन्हें राज्य सरकार द्वारा मिल रही सेवाओं से दूर नहीं किया जा सकता है।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने दी अलग राय….

सुप्रीम कोर्ट में ‘आधार’ मामले पर सुनवाई के दौरान जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ ने बुधवार को कहा कि आधार ऐक्ट को सदन से धन विधेयक की तरह पास कराना असंवैधानिक है और यह मूलभूत ढ़ांचे के सिद्धांत का उल्लंघन करता है। उन्होंने कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 110 का उल्लंघन है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि मोबाइल हमारे समय में जीवन का एक अहम हिस्सा बन गया है और इसे आधार से जोड़ दिया गया। ऐसा करने से निजता, स्वतंत्रता और स्वायत्तता को ख़तरा है। उन्होंने कहा कि वो मोबाइल से आधार नंबर को डीलिंक करने के पक्ष में हैं।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्डरिंग एक्ट के संबंध में कहा कि यह क़ानून मानकर क्यों चल रहा है कि सभी बैंक खाताधारक धांधली करने वाले हैं।
उन्होंने कहा कि यह मानकर चलना कि बैंक में खाता खोलने वाला हर व्यक्ति संभावित आतंकी या धांधली करने वाला है, यह अपने आप में क्रूरता है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने यह भी कहा कि डेटा के संग्रह से नागरिकों की व्यक्तिगत प्रोफ़ाइलिंग का भी ख़तरा है। इसके ज़रिए किसी को भी निशाना बनाया जा सकता है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि इससे संवेदनशील डेटा के दुरुपयोग होने की आशंका है और थर्ड पार्टी के लिए यह आसान है। उन्होंने कहा कि निजी कारोबारी भी बिना सहमति या अनुमति के व्यक्तिगत डेटा का दुरुपयोग कर सकते हैं। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि आधार प्रोग्राम समाधान तलाशने में नाकाम रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत में आधार के बिना जीना अब मुश्किल है और यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। यदि आधार को प्रत्येक डाटाबेस से जोड़ दिया जाए तो ऐसे में निजता के अधिकार के उल्लंघन की आशंका है। न्यायमूर्ति चन्द्रचूड़ ने कहा कि संसद को कानून बनाने का अधिकार है, लेकिन सुरक्षा की गैर मैजूदगी में यह विभिन्न अधिकारों के उल्लंघन का कारण बन सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर किसने क्या कहा….

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आधार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा है कि इससे सरकारी योजनाओं को सही लोगों तक पहुंचाने के साथ ही हर वर्ष ₹90,000 करोड़ बचत करने में मदद मिली है। उन्होंने कहा कि न्यायिक समीक्षा के बाद आधार को स्वीकार करना न्यायपालिका का अत्यंत स्वागतयोग्य कदम है। वहीं, अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल ने कहा कि ‘आधार’ की संवैधानिक वैधता पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से वह बेहद खुश हैं और यह फैसला ऐतिहासिक व उल्लेखनीय है। इसके अलावा, कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा है कि पार्टी आधार में संशोधन के समय इसे धन विधेयक बताने के मामले को उठाएगी और सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने आधार को निजी कंपनियों के लिए अधिकार कानून बना दिया। दरअसल, जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ ने आधार को धन विधेयक बताने को संविधान से धोखा करार दिया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि मोबाइल फोन, बैंक खातों व अन्य सेवाओं से ‘आधार’ लिंक करने की अनिवार्यता खत्म होना आम आदमी के लिए बड़ी राहत है।

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