सुप्रीम कोर्ट ने 18 जून को होने वाली उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की मुख्य परीक्षा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को भी पलट दिया है जिसके तहत यूपीपीसीएस प्रारंभिक परीक्षा-2017 की उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन करने का आदेश दिया गया था।

गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने प्रारंभिक परीक्षा के कुछ प्रश्नपत्रों में गड़बड़ी को देखते हुए यह आदेश पारित किया था। हाईकोर्ट ने एक प्रश्न को डिलीट करने का आदेश दिया था जबकि आयोग द्वारा जारी उत्तर कुंजी के जवाबों को गलत मानते हुए सही जवाब देने वाले अभ्यर्थियों को पूरे अंक देकर संशोधित परिणाम जारी करने का निर्देश दिया गया था।

इससे पहले मंगलवार कोसुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा था कि अगर न्यायिक समीक्षा करते हुए कोर्ट प्रतियोगी परीक्षाओं में दखल देता रहेगा तो परीक्षा की गरिमा खतम हो जाएगी। कोर्ट ने कहा कि एक सीमा रेखा तय करनी होगी कि न्यायिक समीक्षा करते हुए कोर्ट किस हद तक परीक्षा में दखल दे सकता है। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक समीक्षा करते हुए कोर्ट परीक्षा के उत्तर की जांच नहीं कर सकता।जब तक कि उत्तर के बारे में कोई संदेह न हो कोर्ट को दखल नहीं देना चाहिए अन्यथा ऐसे मामलों की बाढ़ आ जाएगी।

यूपीपीएससी की ओर से पेश एएसजी मनिंदर सिंह ने मुख्य परीक्षा पर रोक लगाने या टालने का विरोध करते हुए कहा कि यूपीपीएससी ने प्रारंभिक परीक्षा के बारे में उठाई गई आपत्तियों की जांच के लिए कमेटी गठित की और कमेटी ने सभी आपत्तियों की जांच की और उसके बाद ही 19 जनवरी को रिजल्ट घोषित किया गया। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक परीक्षा में करीब 16000 परीक्षार्थी सफल हुए हैं। सिंह ने कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि कोर्ट पहले कह चुका है कि विशेषज्ञ समिति के फैसले मे कोर्ट को दखल नहीं देना चाहिए।

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