तनुश्री पारीक बनी देश की पहली महिला BSF अधिकारी, बॉर्डर फिल्म से प्रेरणा लेकर बनीं असिस्टेंट कमांडेंट…

0
794

देश की महिलाएं चुनौती वाले क्षेत्रों में भी बढ़चढ़ कर न केवल हिस्सा ले रही हैं, बल्कि अपने साहस से नितनई शौर्यगाथाएं भी लिख रही हैं। वैसे तो सुरक्षा के लगभग हर क्षेत्र में महिलाएं अपनी पहचान कायम कर चुकी हैं, मगर सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ अभी तक इनसे अछूता था। राजस्थान की 25 वर्षीय तनुश्री ने बीएसएफ में असिस्टेंट कमांडेंट बनकर इस कमी को भी पूरा कर दिया। हालांकि वर्ष 2015 में बीएसएफ में पहली महिला अधिकारी सतवंत अटल त्रिवेदी थी। लेकिन वह सिविल सेवा की अधिकारी थी। राजस्थान की तनुश्री पारीक देश की पहली बीएसएफ महिला अधिकारी बन गई हैं। उनका चयन यूपीएससी द्वारा साल 2014 में करायी गयी परीक्षा में हुआ था। तनुश्री ने टेकनपुर स्थित सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) अकादमी में आयोजित पासिंग आउट परेड में देश की पहली महिला अधिकारी (असिस्टेंट कमांडेंट) के रूप में हिस्सा लिया और 67 अधिकारियों के दीक्षांत समारोह में परेड का नेतृत्व भी किया और उन्हें इस मौके पर सम्मानित किया गया। तनुश्री ने बीएसएफ अकादमी में अधिकारियों के 40वें बैच में बतौर सहायक कमांटेंड 52 हफ्तों का प्रशिक्षण लिया था। उन्हें पंजाब में भारत-पाकिस्तान सीमा पर तैनाती मिली है।

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने तनुश्री के अधिकारी बनने पर कहा, “इस बात की खुशी है कि बीएसएफ को पहली फील्ड ऑफिसर मिली है। उम्मीद करता हूं कि और भी महिला अधिकारी आ रही हैं, जो सीमाओं की सुरक्षा करेंगी. सेना और अर्धसैनिक बलों में महिला अधिकारी भी अपनी जिम्मेदारी का बेहतर तरीके से निर्वहन कर रही हैं।” तनुश्री पारीक राजस्थान में बीकानेर की रहने वाली है और वह बताती हैं कि उन्हें बचपन से भी सेना में जाने की लगन थी। तनुश्री पारीक का कहना है कि उन्‍होंने बीकानेर में करीब से बीएसएफ के कामकाज के तरीके को देखा और उन्होंने नौकरी के लिए नहीं पैशन के लिए बीएसएफ को चुना। साथ ही तनुश्री ने कहा, “मेरा फोर्स में जाना तभी मायने रखेगा, जब दूसरी लड़कियां भी BSF ज्वाइन करना शुरू करेंगी। लड़कियां सूरज से बचने के लिए सनस्क्रीन लगाना छोड़ें, धूप में तपकर खुद को साबित करें। मुझे गर्व है कि मैं देश की पहली महिला कॉम्बैट अॉफिसर हूं।” तनुश्री स्कूल और कॉलेज के दौरान एनसीसी कैडिट रही। तनुश्री आईएएस प्री और आरएएस प्री में सफलता हासिल कर चुकी हैं।

तनुश्री ने बताया कि बीकानेर में बॉर्डर फिल्म की शूटिंग हो रही थी और इस समय तनुश्री स्‍कूल जाने लगी थी। इसमें सेना का अहम रोल था और इसी फिल्‍म से प्रेरणा लेकर उन्‍होंने बीएसएफ में जाकर देश की सेवा करने का बनाया था। उन्होंने कहा कि पापा शूटिंग के फोटो दिखाकर इन्स्पायर करते। बस वहीं से ठान लिया था कि वर्दी वाली सर्विस में ही जाना है। बीकानेर में BSF के कामकाज के तरीके को देखा। तब समझ में आया कि आर्मी की तरह ये ऐसी फोर्स है जो 24 घंटे देश की बॉर्डर को महफूज रखती है।

गौरतलब है कि हाल ही में एयरफोर्स ने फाइटर प्लेन उड़ाने के लिए महिला पायलट को इजाजत दी है, उसी तरह बीएसएफ में भी बॉर्डर पर ऑपरेशनल ड्यूटी के लिए बतौर अफसर महिलाओं को कमान सौंपने का फैसला किया है। सीमा सुरक्षा बल ने साल 2013 में महिला अधिकारियों की नियुक्ति शुरू की थी औऱ इसी कड़ी के तहत तनुश्री पारीक असिस्टेंट कमांडेंट के तौर पर बीएसएफ में चुनी गई हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here