UPSC: सिविल सेवा परीक्षा 2016 का अंतिम परिणाम जारी, जानें टॉपर नंदिनी ने सफल होने के बाद क्या कहा?

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संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने बुधवार को सिविल सेवा परीक्षा 2016 के अंतिम परिणाम घोषित कर दिए। परीक्षा में कुल 1099 परीक्षार्थी सफल हुए इसमें आईएएस के लिए 180, आईएफएस के लिए 45 और आईपीएस के लिए 150 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। इनके अलावा केंद्रीय सेवाओं में ग्रुप-ए के लिए 603 और ग्रुप-बी के लिए 231 का चयन हुआ है। भारतीय राजस्‍व सेवा की अधिकारी नंदिनी केआर ने इस परीक्षा में टॉप किया है। वह वर्तमान में फरीदाबाद में नेशनल कस्‍टम्‍स, एक्‍साइज एंड नार्कोटिक्‍स एकेडमी में प्रशिक्षण ले रही हैं। वहीं अमृतसर के अनमोल शेर सिंह बेदी और गोपालकृष्‍ण रोनांकी क्रमश: दूसरे और तीसरे नंबर पर रहे। यह पहला मौका है जब दोनों टॉप-2 इंजीनियर हैं। आतंकवाद प्रभावित जम्मू और कश्मीर से 14 युवा भी सिलेक्ट हुए हैं। पहली बार राज्य से एक साथ इतने युवा यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में सफल रहे हैं। कश्मीरी वन अधिकारी बिलाल भट 10वें स्थान पर रहे।टॉप-25 में सात महिलाएं और 18 पुरुष हैं जबकि टॉप 10 में तीन महिलाएं हैं। 1099 उम्मीदवारों में 846 पुरुष और 253 महिलाएं हैं। सफल उम्मीदवारों में 44 दिव्यांग भी हैं।

नंदिनी के अलावा सौम्‍या पांडे और श्‍वेता चौहान भी टॉप-10 में रहीं। नतीजों में जनरल कैटेगरी से 500, ओबीसी से 347,एससी से 163 और एसटी से 89 उम्‍मीदवार चुने गए। यह लगातार तीसरा साल है जब महिला उम्‍मीदवार यूपीएससी सिविल सेवा टॉप की है। नंदिनी से पहले 2015 में टीना डाबी और 2014 में इरा सिंघल ने टॉप किया था। 2014 की यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षाओं में तो टॉप-3 में महिलाएं ही रही थीं।

ये हैं टॉप 10…

1. नंदिनी के आर
2. अनमोल शेर सिंह बेदी
3. गोपालकृष्ण रोनांकी
4. सौम्या पांडेय
5. अभिलाष मिश्रा
6. कोठामासू दिनेश कुमार
7. आनंद वर्धन
8. श्वेता चौहान
9. सुमन सौरव मोहंती
10. बिलाल मोहीउद्दीन भट

कर्नाटक की रहने वाली नंदिनी ने बताया कि आईएएस बनना उनका सपना था। यह उनका चौथा प्रयास था। उन्‍होंने बताया कि यह सपने के सच होने जैसा है। उन्‍होंने 2014 में भी सिविल सर्विसेज परीक्षा पास की थी और उन्‍हें भारतीय राजस्‍व सेवा मिली थी। नंदिनी ने बताया कि 2014 में आईआरएस मिलने के बाद 2015 में भी परीक्षा दी थी लेकिन सफल नहीं हो सकी। लेकिन हार नहीं मानी। नंदिनी देश के शिक्षा क्षेत्र में अपना योगदान देना चाहती हैं। नंदिनी ओबीसी कैटेगरी से आती हैं औऱ उन्‍होंने बेंगलुरु के एमएस रमैया तकनीकी संस्‍थान से सिविल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन की है। सिविल सर्विसेज परीक्षा में उन्‍होंने कन्‍नड़ साहित्‍य को वैकल्पिक भाषा के रूप चुना था। उन्होंने बताया कि आईआरएस बनने के बाद इस सफलता के लिए जी-जान लगा दी थी। नंदिनी दिसंबर 2014 में कर्नाटक में पीडब्ल्यूडी इंजीनियर बनी थीं। बता दें कि नंदिनी को 2014 में 849वीं रैंक हासिल हुई थी। नंदिनी ने नतीजों के बाद बताया कि लड़कियों को अपने पर विश्वास होना चाहिए और अपने विकास के लिए लड़कियों को काम करना चाहिए और वह इसके लिए अपनी फैमिली को क्रेडिट देना चाहती हैं।

नंदिनी ने बताया, ” मेरे पिता हाईस्कूल में शिक्षक हैं, यह सफलता मैं उनको समर्पित करती हूं। माता-पिता मेरे आदर्श हैं। मैं अपने पिता के आदर्श जीवन को सिविल सर्विस में कार्य करते हुए अपनाना चाहती हूं। मैंने शुरू से ही सिविल सर्विस में जाने का लक्ष्य तय किया हुआ था। चार बार परीक्षाओं की तैयारी मैंने एक ही समयसारिणी से की मगर इस बार सोच से भी ज्यादा सफलता मिली है। कह सकती हूं कि मेरा लक्ष्य तय था और इसकी तैयारी के लिए मैं सबसे ज्यादा अहमियत कड़ी मेहनत को देती हूं। एकाग्रचित होकर सफलता का कोई भी मुकाम पाया जा सकता है। यह पहली बार नहीं है जब लड़कियां सफलता के मुकाम छू रही हैं। लड़कियां कई क्षेत्रों में काफी आगे हैं। मेरी प्राइमरी, माध्यमिक शिक्षा कर्नाटक के कोलार जिला में हुई। मैंने बचपन से कन्नड़ भाषा में पढ़ाई की है।
मेरी रुचि साहित्य पढ़ने में है। बचपन से ही कन्नड़ व अंग्रेजी में साहित्य पढ़ती रही हूं। हां, अब कुछ समय से हिन्दी पढ़ने का भी प्रयास कर रही हूं। हिन्दी से भी मेरा लगाव हो रहा है। देश में तीन प्रमुख समस्याएं हैं- महिलाओं के साथ होने वाला भेदभाव, भ्रष्टाचार को राजनीतिक संरक्षण, लोगों के नैतिक मूल्यों में गिरावट
मैं अपना सर्वश्रेष्ठ इस दौरान देना चाहती हूं। खासतौर पर मैं महिलाओं को सशक्त करने के लिए काम करना चाहती हूं। समाज के मौजूदा दौर में एक अच्छा नागरिक बनाना ज्यादा जरूरी है।”

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