सिविल सर्विस में नहीं हुए सेलेक्ट तो प्राइवेट सेक्टर में अच्छी नौकरी दिलाएगा UPSC, ये है प्लान…

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हमारे देश में सिविल सर्विसेज में जाने का सपना हर छात्र देखता है और इसके लिए वे कठिन मेहनत भी करते हैं लेकिन सीट कम होने से कई छात्रों का सेलेक्‍शन नहीं हो पाता। यह स्थिति किसी छात्र के लिए तब और खराब हो जाती है जब बार-बार एग्‍जाम देने के बावजूद उसका सेलेक्‍शन नहीं हो पाता। यूपीएससी की परीक्षा में कई बार शामिल होकर भी अफसर नहीं बन पाने वाले परीक्षार्थियों के लिए अच्छी खबर है। अब यूपीएससी के अंकों के आधार पर उन्हें निजी क्षेत्र में अच्छी नौकरी मिल सकेगी। दरअसल, केंद्रीय कार्मिक विभाग एक ऐसा पोर्टल तैयार कर रहा है, जिसमें यूपीएससी समेत सभी केंद्रीय सार्वजनिक भर्ती अभिकरण में शामिल होने वाले छात्रों का पूरा ब्योरा रहेगा। यहां से निजी क्षेत्र की कंपनियां अपने लिए उपयुक्त उम्मीदवारों से सीधे संपर्क कर सकेंगी।

पोर्टल पर देंगे जानकारी

केंद्रीय कार्मिक एवं लोक शिकायत मंत्रालय  के मुताबिक, यूपीएससी, एसएससी समेत अन्य सभी केंद्रीय सार्वजनिक भर्ती अभिकरण की परीक्षाओं में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के नाम, पते, योग्यता, प्राप्त अंक और रैंकिंग को पोर्टल पर डाला जाएगा। यहां से सार्वजनिक क्षेत्र या निजी क्षेत्र के नियोक्ता योग्य उम्मीदवारों का चयन कर सकेंगे। यदि कोई आंकड़े नहीं देना चाहे तो फॉर्म भरते समय  विकल्प दिया जाएगा।

कैट से आया विचार

एक अधिकारी ने बताया कि यह विचार मैनेजमेंट संस्थानों में प्रवेश के लिए होने वाले कॉमन एडमिशन टेस्ट से आया। जिस तरह कैट के आंकड़ों का उपयोग आईआईएम के अलावा भी कई संस्थान करते हैं, उसी तरह यूपीएससी  परीक्षाओं के साथ क्यों नहीं किया जा सकता? यह प्रस्ताव शासन के सामने रखा तो उन्हें यह  पसंद आया। उन्होंने इसका दायरा यूपीएससी से बढ़ाकर सभी केंद्रीय सार्वजनिक भर्ती अभिकरण तक कर दिया।

इससे पहले कार्मिक राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह ने लोक सभा में स्पष्ट किया है कि सरकार यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2017 में जनरल स्टडीज को और अधिक वेटेज देने संबंधी किसी प्रस्ताव पर विचार नहीं कर रही है। यह परीक्षा इस वर्ष 18 जून को होनी है। उन्होंने यह भी बताया कि संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) बासवान समिति की उस रिपोर्ट पर विचार कर रहा है जिसमें देश के शीर्ष नौकरशाहों के चयन के लिए सेवा परीक्षा में बदलाव करने का सुझाव दिया गया है।

गौरतलब है कि संघ लोक सेवा आयोग ने अगस्त 2015 में पूर्व मानव संसाधन विकास सचिव एवं सेवानिवृत्त आईएसएस अधिकारी बी एस बासवान की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति गठित की थी जो सिविल सेवा परीक्षा की पद्धति की समीक्षा कर सके। बहरहाल, जितेन्द्र सिंह ने यह साफ कर दिया है कि सरकार प्री या मेन्स दोनों में से किसी भी परीक्षा में जनरल स्टडीज के वेटेज में बदलाव करने नहीं जा रही है।

 

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