भारत का पहला सैटेलाइट ‘आर्यभट्ट’ बनाने वाले वैज्ञानिक और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष (1984-1994) उडुपी रामचंद्र राव का 85 वर्ष की उम्र में सोमवार को निधन हो गया। पद्म भूषण और पद्म विभूषण पुरस्कार से सम्मानित राव के नेतृत्व में 18 उपग्रह डिज़ाइन, तैयार और अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किए गए थे। अपनी मृत्यु से पहले तक वे तिरुवनंतपुरम में भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (IIST) के कुलपति के पद पर तैनात थे। 85 साल के वैज्ञानिक राव ने सुबह 2.30 बजे अंतिम सांस ली। गौरतलब है कि उन्हें इसी साल दिल की बीमारी के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था, तभी से उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी उनके निधन पर शोक जताया। उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि भारत के अंतरिक्ष प्रोग्राम में राव का योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।

राव का जन्म कर्नाटक के एक छोटे से गांव आदमपुर में 10 मार्च 1932 को एक साधारण परिवार में हुआ था। प्रोफेसर राव भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम से सतीश शावन और विक्रम साराभाई के समय से जुड़े थे। 1984 से 1994 के बीच उन्होंने दस साल के लिए इसरो के अध्यक्ष के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। राव के ही नेतृत्व में, भारत ने 1975 में अपने पहले सैटलाइट ‘आर्यभट्ट’ को बनाया। इसके अलावा 18 और सैटलाइट जिसमें भास्कर, ऐप्पल, रोहिणी, इनसैट-1 और इनसैट-2 सीरीज भी उनके नेतृत्व में ही बनाया गया। राव के नेचृत्व में ही रिमोट सेंसिंग सैटलाइट आईआरएस-1बी को डिजाइन किया गया और फ्रैबिकेशन के बाद लॉन्च किया गया जिससे कम्युनिकेशन, रिमोट सेंसिंग और मौसम की जानकारी में मदद मिली।

1985 में डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस में स्पेस कमिशन एंड सेक्रेटरी के चेयरमैन का पद संभालने के बाद राव ने रॉकेट तकनीक पर जोर दिया। इसका परिणाम 1992 में एएसएलवी रॉकेट के रूप में सामने आया। वो राव ही थे जिनकी वजह से ऑपरेशनल पीएसएलवी लॉन्च वीइकल बनाया गया, जिससे 850 किलो तक के सैटलाइट को ऑर्बिट में लॉन्च किया जा सकता था। अपने कार्यकाल में इनसैट सैटलाइट लॉन्च कराने की भूमिका भी उन्होंने निभाई। उन्होंने वर्ष 1991 में क्रायोजेनिक तकनीक और भूस्थैतिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी) के विकास की पहल भी की।

उन्होंने भारत के लिए आर्यभट्ट से लेकर मॉम यानी मार्स आॅर्बिट मिशन के लिए लगातार काम किया और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारत का नाम अग्रणी करने में अमूल्य योगदान दिया। भौतिक विज्ञान प्रयोगशाला (अहमदाबाद) की संचालन परिषद के अध्यक्ष राव अंतरराष्ट्रीय तौर पर विख्यात वैज्ञानिक रहे। राव पिछले कई सालों से विदेशी यूनिवर्सिटी समेत कई संस्थानों में वरिष्ठ पदों पर कार्य कर रहे थे। उन्होंने 10 से ज्यादा इंटरनेशनल अवॉर्ड और कई नेशनल अवॉर्ड जीते थे। राव ने मेसेच्युसेट्स इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलॉजी (MIT) में भी काम किया था। मई 2016 में वह पहले भारतीय हो गए जिन्हें इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉटिकल फेडरेशन की ओर से हॉल आॅफ फेम अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इसरो के पूर्व चेयरमैन राव फिजिकल रिसर्च लैबोरेटरी के गवर्निंग काउंसिल के चेयरमैन और तिरुअनंतपुरम स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट आॅफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में चांसलर भी थे।

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