UPPSC से हुई नियुक्तियों की CBI जांच कराएगी यूपी सरकार, जरूर जानें- किन परिणामों पर पड़ेगा असर

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उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्ववर्ती अखिलेश सरकार के दौरान यूपीपीएससी (उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग) द्वारा की गईं सभी भर्तियों की सीबीआई जांच का आदेश दिया है। इस बात का ऐलान खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में किया। योगी ने कहा कि पिछली सरकार के दौरान भर्तियों में जमकर गड़बड़ी हुई थी। उन्होंने कहा कि भर्तियों की सीबीआई जांच होगी और गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। योगी ने कहा कि पिछली सरकार के दौरान पीसीएस की भर्ती में भ्रष्टाचार हुआ था। सीबीआई जांच के आदेश के बाद करीब 15 हजार भर्तियों पर ग्रहण लग चुका है। यूपीपीएससी द्वारा पीसीएस अफसरों, डॉक्टरों, इंजिनियरों आदि की भर्ती की गई थी। इससे पहले योगी सरकार ने भ्रष्टाचार की शिकायत के बाद यूपीपीएसी द्वारा की जा रही 22 भर्तियों के इंटरव्यू पर रोक लगा दी थी। प्राइमरी टीचर्स की भर्ती, शिक्षामित्रों के समायोजन और यूपी पुलिस में सब इंस्पेक्टरों की भर्ती का मामला तो सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। 72,825 प्राइमरी शिक्षकों की भर्ती और शिक्षामित्रों के समायोजन के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है। कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है।

2012 से अब तक हुईं भर्तियों की सीबीआई जांच के दायरे में 600 से अधिक भर्तियां और 45 हजार से अधिक पद होंगे। इन पदों में करीब 37 हजार तो सिर्फ सीधी भर्ती के हैं। जांच के दायरे में PCS के ही करीब 3 हजार और PCS-J के 1,000 पद शामिल हैं। इसके अलावा डॉक्टरों और इंजिनियरों के साथ ही प्रफेसरों की नियुक्तियों की भी सीबीआई जांच होगी। इन नियुक्तियों पर प्रतियोगी छात्रों ने लगातार सवाल उठाए और इसे लेकर आंदोलन भी हुए। आयोग द्वारा वर्ग विशेष और क्षेत्र विशेष के अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने के आरोपों को लेकर प्रतियोगी छात्रों ने इन भर्तियों को रद्द करवाने और जांच की मांग को लेकर करीब 7 सौ से अधिक याचिकाएं हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कीं। सीबीआई जांच की मांग वाली 3 याचिकाएं अब भी हाई कोर्ट में लंबित है।

सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा सीबीआई जांच की घोषणा के बाद अखिलेश सरकार में यूपीपीएएससी के जरिए नियुक्ति पाने वाले हजारों अभ्यर्थियों की सांसें अटक गई हैं। वहीं, इस मांग को लेकर पिछले 5 वर्षों से संघर्ष कर रहे प्रतियोगी छात्र खुश हैं, क्योंकि जांच और भर्तियों को रद्द करने की मांग को लेकर आंदोलन करने वाले प्रतियोगी छात्रों को पुलिस ज्यादती का सामना भी करना पड़ा था। जांच की घोषणा के बाद इसके दायरे में आने वाली भर्तियों में करीब दो दर्जन तो प्रदेश की सबसे प्रतिष्ठित नौकरी माने जाने वाली पीसीएस और लोअर की भर्तियां ही होंगी। जिनके परिणाम को लेकर सबसे अधिक विवाद उठे और प्रतियोगी छात्रों को सड़क पर उतरना पड़ा।

लोक सेवा आयोग की पीसीएस मेन्स 2015 परीक्षा में सुहासिनी बाजपेयी की कॉपी बदलने का मामला आयोग में हो रही गड़बड़ियों का ताजा उदाहरण रहा है। जिसे पीएम नरेन्द्र मोदी ने खुद अपनी चुनावी सभा में उठाया था। हालांकि पूर्व में पीसीएस परीक्षा का पेपर लीक होने और पीसीएस 2014 की प्री परीक्षा में 25 सवालों के गलत होने का मामला भी सामने आया था। जिसे लेकर प्रतियोगी हाई कोर्ट तक पहुंचे। आयोग ने कोर्ट के आदेश पर संशोधित परिणाम जारी किया था लेकिन विवाद नहीं थमा।

इसके साथ ही यूडीए/एलडीए-2013, पीसीएस 2013 प्री, पीसीएस-जे 2013, पीसीएस 2011 और लोअर सबऑर्डिनेट 2008 की परीक्षाओं को लेकर सबसे अधिक विवाद सामने आया। पीसीएस 2011 में इंटरव्यू के दौरान खास समुदाय और जातियों के अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में अधिक नंबर देकर मेरिट लिस्ट में काफी ऊपर रखने का आरोप लगा। इसे लेकर हाई कोर्ट में याचिका भी दायर की गई। इंटरव्यू में सामान्य वर्ग के साथ एक खास जाति को छोड़कर ओबीसी की अन्य जातियों और अनुसूचित जाति के अभ्यर्थियों के साथ हुए भेदभाव पर हाई कोर्ट ने भी तीखी टिप्पणी की थी। पीसीएस 2011 में पिछड़े वर्ग के जिन 86 अभ्यर्थियों को चुना गया था, उसमें 50 सिर्फ यादव थे। यूपीपीएससी में भर्ती के दौरान सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित पदों पर ओबीसी में से सिर्फ एक जाति विशेष के लोगों की भर्ती का कई मामला सामने आ चुका है।

इसी प्रकार इतिहास प्रवक्ता के 15 पदों पर 31 अक्टूबर 2013 को हुए इंटरव्यू के बाद जो रिजल्ट जारी किया गया था, उसमें सामान्य वर्ग के आरक्षित पदों पर एक जाति विशेष की भर्ती की गई। इतिहास प्रवक्ता के 15 पदों में सामान्य वर्ग के लिए 7 पद, ओबीसी के 5 पद और अनुसूचित जाति के 3 पद आरक्षित किए। सीधी भर्ती में ओबीसी के नाम पर सिर्फ 7 यादव अभ्यर्थी ही इतिहास प्रवक्ता के पद पर सफल घोषित किए गए।

आरोप है कि यूपीपीएससी में सामान्य वर्ग के पदों पर ओबीसी में से एक जाति विशेष के लोगों की भर्ती का खेल लंबे समय से चल रहा था। जेई सिविल 2011 के 542 पदों की सीधी भर्ती में जनरल के 415, एससी/एसटी के 127 पदों पर आरक्षण था। 2013 में जब रिजल्ट आया तो ओबीसी का एक भी पद नहीं होने के बाद 313 ओबीसी स्टूडेंट इसमें सफल घोषित किए गए, इस भर्ती में सामान्य वर्ग के 102 अभ्यर्थी ही सफल घोषित किए गए। सिविल इंजिनियरिंग के लेक्चरर के तीन पदों के लिए 28 अक्टूबर 2013 को हुए इंटरव्यू में एक जाति विशेष का एक अभ्यर्थी, दो एससी सफल हुए, सामान्य वर्ग का कोई नहीं सफल हुआ।

एक महीने पहले ही फाइल ले चुकी है सीबीआई

सीएम योगी ने भले ही आयोग की भर्तियों की सीबीआई जांच की घोषणा बुधवार को की लेकिन सीबीआई आयोग की इन भर्तियों से संबंधित फाइल करीब एक महीने पहले ही ले चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई के एक डेप्युटी एसपी ने भर्तियों की जांच की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे प्रतियोगी छात्रों से ही यह फाइल हासिल की थी। तभी से प्रतियोगी छात्रों को यह आस जगी थी कि एसपी सरकार में हुईं भर्तियों की सीबीआई जांच जरूर होगी।

यह भी था मुद्दा

अनिल यादव के कार्यकाल में भर्तियों में सिर्फ वर्ग विशेष को महत्व देने और नियुक्ति देने का ही आरोप नहीं लगा बल्कि प्रभावशाली लोगों के परिवार वालों के परीक्षा केन्द्र तक बदलने के आरोप लगे। 2013 की पीसीएस प्री परीक्षा में एसपी महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव की बहू रिचा अहलूवालिया का परीक्षा केन्द्र बदले जाने के मामले को भी उठाया गया है।

अनिल यादव के कार्यकाल की कुछ विवादित भर्तियां

अवर अभियंता भर्ती -2011-12
प्रवक्ता भर्ती -2011-12
प्रवक्ता भर्ती -2012-13
प्राविधिक सहायक- 2012-13
राजकीय महाविद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती- 2011-12
राजकीय महाविद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती- 2012-13
चिकित्साधिकारी बैकलॉग भर्ती- 2013-14
सम्मिलित अवर अधीनस्थ सेवा विशेष चयन- 2004/2006
सहायक अभियोजन अधिकारी विशेष चयन- 2006
सहायक अभियोजन अधिकारी सामान्य चयन -2007
सहायक अभियोजन अधिकारी विशेष चयन- 2007
सम्मिलित अवर अभियंता विशेष चयन- 2008
सम्मिलित अवर अधीनस्थ सामान्य चयन परीक्षा- 2008
सम्मिलित राज्य अभियंत्रण सेवा परीक्षा- 2008
सम्मिलित अवर अधीनस्थ सामान्य चयन परीक्षा- 2009
समीक्षा अधिकारी/ सहायक समीक्षा अधिकारी परीक्षा- 2010
कम्प्यूटर ऑपरेटर ग्रेड बी- 2010
सम्मिलित राज्य प्रवर अधीनस्थ परीक्षा- 2011
सम्मिलित राज्य प्रवर अधीनस्थ परीक्षा- 2012
सम्मिलित राज्य प्रवर अधीनस्थ परीक्षा- 2013
पीसीएस-जे मेन्स- 2013
अधीनस्थ कृषि सेवा वर्ग-3 परीक्षा 2013
खाद्य सुरक्षा अधिकारी अधिकारी -2014
राजस्व निरीक्षक परीक्षा- 2014
पीसीएस -2016
आरओ-एआरओ-2015
सहायक अभियोजन अधिकारी (एपीओ) 2015
लोअर सबऑर्डिनेट परीक्षा- 2015
पीसीएस- 2016

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